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अभी तक नहीं हो पाई है लाभ के पद की व्याख्या, संसदीय समिति ने विधि मंत्रालय को विधेयक बनाने को कहा

एक संसदीय समिति को विधि मंत्रालय से कहना पड़ा है कि वह एक ऐसा विधेयक लेकर आए जिसमें उन पदों की सूची हो जिस पर आसीन रहने से कोई संसद सदस्य अयोग्य ठहराया जा सके।

Rail Budget Merger, General budget Rail Budget, Finance Ministryभारतीय संसद।

देश में कई सांसदों को लाभ के पद पर काम करने को लेकर अयोग्यता का सामना करना पड़ा है। लेकिन लाभ के पद जैसी किसी चीज की न तो किसी कानून में और न ही किसी फैसले में व्याख्या की गई है। इसके चलते एक संसदीय समिति को विधि मंत्रालय से कहना पड़ा है कि वह एक ऐसा विधेयक लेकर आए जिसमें उन पदों की सूची हो जिस पर आसीन रहने से कोई संसद सदस्य अयोग्य ठहराया जा सके। लाभ के पद संबंधी संसद की संयुक्त समिति ने अपनी दो ताजा रपटों में कहा है कि लाभ के पद की व्याख्या संविधान, जन प्रतिनिधित्व कानून, संसद (अयोग्यता निवारण) अधिनियम या हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए किसी फैसले में नहीं की गई है। यह स्पष्ट है कि ऐसी कोई संपूर्ण व्याख्या तय करना मुश्किल है जिसमें सरकार के तहत आने वाले विभिन्न प्रकार के सभी पदों को शामिल किया जा सके।

अब संयुक्त समिति ने विधि मंत्रालय से कहा है कि वह एक ऐसे विधेयक का मसौदा तैयार करे जिसमें स्पष्ट रूप से उन निकायों (कार्यालयों की स्पष्ट सूचना हो जिसके पदों पर आसीन होने से सांसद अयोग्य हो जाएंगे, ऐसे कार्यालय) और ऐसे निकाय जिसमें छूट दिए जाने की जरूरत है। ऐसे कार्यालय और निकाय जिनके पदों पर रहने से सांसद अयोग्य घोषित नहीं किए जाएंगे। समिति ने इस बात को रेखांकित किया कि संसद (अयोग्यता निवारण) अधिनियम के भाग एक और भाग दो में उन निकायों की सूची है, जिसके पद पर रहने वाले को अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा।

संयुक्त समिति ने यह विचार दिया है कि बहुत से ऐसे निकाय या कार्यालय हो सकते हैं जिन्हें संभवत: इस सूची में शामिल नहीं किया गया हो। इसके परिणामस्वरूप, इससे यह संदेश जाता है कि ‘नकारात्मक सूची’ से बाहर के निकायों या कार्यालयों की सदस्यता सुरक्षित है। इससे सांसदों की सदस्यता बाधित नहीं होगी जो कि निश्चित ही कोई सही स्थिति नहीं है, क्योंकि नकारात्मक सूची से बाहर के सभी निकायों कार्यालयों की इस मकसद के लिए तय किए गए दिशा-निर्देशों के तहत जांच किए जाने की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निकायों के संबंध में ऐसी किसी भी अस्पष्टता को दूर करने की जरूरत है जो किसी सांसद की अयोग्यता का कारण बन सकती है। संसद में रखी गई रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि विदेश मंत्रालय के तहत काम करने वाले चार निकायों के सदस्य सांसद लाभ के पद कानून के दायरे से बाहर रहेंगे और अयोग्य घोषित नहीं किए जाएंगे।

संयुक्त समिति ने सिफारिश की है कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, विदेश मंत्रालय की शोध और सूचना प्रणाली व हिंदी सलाहकार समिति को संसद (अयोग्यता निवारण) अधिनियम 1959 के प्रासंगिक अनुभाग के तहत रहना चाहिए और इसका सदस्य होने के नाते संसद सदस्य की योग्यता समाप्त नहीं होनी चाहिए। भाजपा सदस्य सत्यपाल की अगुवाई वाली समिति ने विदेश मंत्रालय के इस विचार से भी सहमति जताई है कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की सदस्यता को लाभ का पद नहीं माना जाए। इसीलिए इसे अयोग्यता कानून की अनुसूची में नहीं रखा जाए।

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