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पद्मश्री लौटाना चाहते हैं ओडिशा के Mountain Man, बोले- सम्मान पाने के बाद नहीं मिल रही जॉब, चींटी के अंडे खाकर हो रहा गुजारा

दैतारी नायक ओडिशा के केनोझार जिले से ताल्लुक रखते हैं। यह जिला खनिज संपन्न माना जाता है। दैतारी नायक को गोनासिका पहाड़ पर 3 किलोमीटर लंबी नहर खोदने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

Author भुवनेश्वर | Updated: June 25, 2019 1:13 PM
ओडिशा के माउंटेनमैन दैतारी नायक। फोटो सोर्स: सोशल मीडिया

ओडिशा के ‘माउंटेनमैन’ के नाम से मशहूर दैतारी नायक गरीब आदिवासी हैं। ओडिशा में पहाड़ पर 3 किलोमीटर लंबी सुरंग खोदने के लिए मोदी सरकार ने उन्हें इस साल (2019) पद्मश्री से सम्मानित किया था, लेकिन यही अवॉर्ड अब उनके लिए मुसीबत बन चुका है। दैतारी बताते हैं कि इस अवॉर्ड की वजह से उन्हें कोई भी काम नहीं दे रहा है। हालात इतने ज्यादा बुरे हो चुके हैं कि वह चींटी के अंडे खाकर गुजारा कर रहे हैं। ऐसे में वह अपना यह सम्मान लौटाने की बात कह रहे हैं।

कौन हैं दैतारी नायक: दैतारी नायक (75) ओडिशा के केनोझार जिले के तालाबैतारानी गांव में रहते हैं। वह खेती-बाड़ी करते हैं और उन्हें इस साल गोनासिका पहाड़ों में 3 किलोमीटर लंबी नहर खोदने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। बता दें कि दैतारी ने 2010 से 2013 के दौरान पहाड़ी रास्ते को कुदाल से खोद दिया था, जिससे इलाके की 100 एकड़ जमीन पर खेती हो रही है। गौरतलब है कि पद्मश्री देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक अवॉर्ड है।

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जानें क्या बोले पद्मश्री अवॉर्डी: दैतारी नायक ने बताया, ‘‘पद्मश्री अवॉर्ड किसी भी तरह मेरे काम नहीं आ रहा। यह सम्मान मिलने से पहले मैं दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर लेता था। अब यह सम्मान मिलने के बाद लोग मुझे काम ही नहीं दे रहे। उन्हें लगता है कि वह काम मेरे सम्मान से काफी छोटा है। ऐसे में हमें चींटी के अंडे खाकर गुजारा करना पड़ रहा है। अपना घर चलाने के लिए मैं तेंदू के पत्ते और अंबा सधा (आम पापड़) बेच रहा हूं। इस अवॉर्ड से मेरी अहमियत ही खत्म हो गई है। मैं यह सम्मान लौटाना चाहता हूं, जिससे मैं कुछ काम कर सकूं।’’

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बकरी के बाड़े में टांगा पद्मश्री मेडल: दैतारी नायक ने बताया, ‘‘मुझे वृद्धावस्था पेंशन के रूप में हर महीने 700 रुपए मिलते हैं, लेकिन इससे अपने बड़े परिवार को पालना काफी मुश्किल है। कुछ साल पहले उन्हें इंदिरा आवास योजना के तहत एक घर अलॉट किया गया था, लेकिन वह अभी अधूरा पड़ा है। इसके चलते दैतारी अपने पुराने घर में रहने के लिए मजबूर हैं। इन हालात से वह इतने ज्यादा परेशान हो चुके हैं कि उन्होंने पद्मश्री मेडल को बकरी के बाड़े में टांग दिया है।’’

अब तक पूरे नहीं हुए वादे: दैतारी के बेटे आलेख भी मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता से सड़क बनाने व नहर का कटाव रोकने के वादे किए गए थे, जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘अधिकारियों ने पथरीली नहर को सीमेंटेड कराने का भी वादा किया था, जो अब तक नहीं हुआ है। लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराने में असफल रहने के कारण मेरे पिता काफी परेशान रहते हैं।’’

कांग्रेस ने ओडिशा सरकार पर साधा निशाना: कांग्रेस प्रवक्ता सत्य प्रकाश नायक ने कहा, ‘‘आदिवासी किसान की दुर्दशा से पता चलता है कि ओडिशा की सरकार किसानों से खोखले वादे कर रही है। नवीन पटनायक ने किसानों के लिए कालिया योजना शुरू की थी, लेकिन उनका प्रशासन उस किसान के लिए भी कुछ नहीं कर रहा है, जिसने खेती के लिए नहर खोद दी थी।’’

जिला कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश: केनोझार के जिला कलेक्टर आशीष ठाकरे ने कहा, ‘‘इस मामले की जांच की जाएगी कि दैतारी नायक अपना अवॉर्ड क्यों लौटाना चाहते हैं। हम उनकी समस्या सुनेंगे और सम्मान न लौटाने के लिए समझाने की कोशिश भी करेंगे।’’

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