ओडिशा के ढेंकनाल जिले की रहने वाली 15 साल की एक आदिवासी लड़की के साथ इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। नौकरी दिलाने के बहाने इस नाबालिग लड़की को उत्तर प्रदेश ले जाकर बेच दिया गया, जहां दो साल तक उसके साथ लगातार यौन शोषण (गलत काम) किया गया। पुलिस के अनुसार, अब इस पीड़िता को सुरक्षित बचा लिया गया है।
लड़की की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO – बच्चों को यौन अपराधों से बचाने का कानून) एक्ट की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
धोखे से कैसे फंसाया गया?
पीड़िता की मां बहुत बीमार थीं और उनके ऑपरेशन (सर्जरी) के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। लड़की किसी भी तरह काम ढूंढ रही थी। उसकी इस लाचारी का फायदा उठाकर इलाके के ही एक दलाल ने उसे भुवनेश्वर में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच दिया। लेकिन वह उसे भुवनेश्वर ले जाने के बजाय उत्तर प्रदेश के झांसी ले गया और वहां बेच दिया।
पुलिस ने बताया कि दलाल ने इस नाबालिग लड़की को झांसी के एक व्यक्ति को 1 लाख रुपये में बेच दिया था। वहां उसे तीन महीने तक एक घर में कैद करके रखा गया और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म (बलात्कार) किया गया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इसके बाद उसकी मर्जी के बिना जबरन उसका गर्भपात (अबॉर्शन) करा दिया गया। इतना ही नहीं, इसके बाद उसे दोबारा 50 हजार रुपये में एक दूसरे आदमी को बेच दिया गया। कैद के दौरान लड़की को बुरी तरह पीटा जाता था और कई-कई दिनों तक खाना भी नहीं दिया जाता था।
लड़की कैसे आजाद हुई?
इस नरक से लड़की की आजादी 19 मई को हुई, जब झांसी के एक स्थानीय वकील ने उसकी मदद की और उसे पुलिस के सामने पेश किया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने लड़की को ओडिशा वापस जाने के लिए ट्रेन का टिकट दिया। ढेंकनाल पहुंचने के बाद लड़की ने अपने परिवार को पूरी आपबीती सुनाई और 23 मई को पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
ढेंकनाल के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव सोनकर ने बताया कि लड़की को पहली बार बेचने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस 46 वर्षीय आरोपी का नाम बिनय पात्रा है, जिसे विशाखापत्तनम से पकड़ा गया है। मामले की आगे की जांच के लिए पुलिस की दो टीमें झांसी भेजी गई हैं।
कामाख्यानगर थाने के प्रभारी जितेंद्र कुमार मल्लिक ने बताया कि पुलिस टीमें इस मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ कर रही हैं। पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है और उसे ढेंकनाल की बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है ताकि उसकी देखभाल हो सके।
मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग का कड़ा रुख
इस घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया है। आयोग ने ओडिशा और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों और ढेंकनाल के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया है। उनसे दो हफ्ते के भीतर जांच की पूरी रिपोर्ट और पीड़िता की मदद के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
दूसरी तरफ ओडिशा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभना मोहंती ने 30 मई को पीड़िता के घर जाकर उससे मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पुलिस को इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं और वे खुद रोज इस केस की निगरानी कर रही हैं।
