रूस और यूक्रेन के बीच साल 2022 की फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। इस हमले में मॉस्को में चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। मृतक की पहचान ओडिशा के गंजाम जिले के रहने वाले 30 वर्षीय अंजराना रमैया के रूप में हुई है। माना जा रहा है कि मॉस्को क्षेत्र में युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले वह पहले भारतीय नागरिक हैं।

जानकारी अनुसार रमैया पिछले एक साल से मॉस्को की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रहे थे। वह घर पैसे भेजकर परिवार की आर्थिक मदद कर रहे थे। साथ ही अपने पुराने घर को बढ़ाना भी चाहते थे। हाल ही में वह महाशिवरात्रि के मौके पर गांव आए थे और 22 मार्च तक परिवार के साथ रहे थे। चार भाई-बहनों में सबसे छोटे रमैया रेगुलर घरवालों के कॉन्टैक्ट में रहते थे, लेकिन शनिवार रात उनका कोई फोन नहीं आया।

एजेंसी ने मौत की जानकारी नहीं दी

ओडिशा के आंध्र प्रदेश सीमा के पास स्थित माधाबांधा गांव में रहने वाले उनके परिवार को उनकी मौत की खबर रविवार को मिली। रमैया के भाई अंजराना गणेश ने आरोप लगाया कि जिस प्राइवेट एजेंसी के जरिए रमैया को मॉस्को में नौकरी मिली थी, उसने परिवार को ड्रोन हमले की जानकारी तक नहीं दी।

गणेश ने बताया, “जब हमने एजेंसी से भाई के बारे में पूछा तो पहले उन्होंने अनजान बनने की कोशिश की। बाद में गांव के कुछ और लोग वहां पहुंचे तो उन्होंने रमैया की मौत की जानकारी दी।” उन्होंने कहा कि परिवार को सबसे पहले इस घटना की जानकारी पास के गांव के एक युवक से मिली, जो खुद भी मॉस्को में काम करता है।

दिसंबर 2024 में मॉस्को गए थे रमैया

गणेश ने बताया, “मैंने शुक्रवार रात आखिरी बार रमैया से बात की थी। शनिवार को कॉन्टैक्ट नहीं हो पाया। रविवार को दूसरे युवक के फोन से हमें उनकी मौत का पता चला।” रमैया की शादी नहीं हुई थी और उनके भेजे पैसों से ही परिवार का गुजारा चलता था। उनके पिता और बड़े भाई बंटाई पर खेती करते हैं। इलाके के कई युवाओं की तरह रमैया भी बेहतर रोजगार की तलाश में गांव छोड़ना चाहते थे। उन्होंने एक स्थानीय संस्थान से तकनीकी प्रशिक्षण लिया और उसी के जरिए उन्हें मॉस्को की कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी मिली।

दिसंबर 2024 में रमैया मॉस्को गए थे। परिवार को रूस-यूक्रेन युद्ध की जानकारी थी लेकिन रमैया उन्हें भरोसा दिलाते थे कि जिस इलाके में वह काम कर रहे हैं वहां हालात सामान्य हैं। गणेश के मुताबिक रमैया कुछ साल रूस में काम करके पैसे बचाना चाहते थे ताकि ओडिशा लौटकर अपना कारोबार शुरू कर सकें। इसी दौरान वह घर की दूसरी मंजिल के निर्माण के लिए भी पैसे भेज रहे थे, लेकिन काम अभी शुरुआती दौर में ही था कि यह दुखद हादसा हो गया।

अब परिवार सरकार से रमैया का शव भारत लाने और उनके माता-पिता को मुआवजा देने की मांग कर रहा है। गंजाम के जिला कलेक्टर वी कीर्ति वासन ने बताया कि प्रशासन इस मामले में नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि राजनयिक माध्यमों से कार्रवाई शुरू कर दी गई है और रमैया के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द ओडिशा लाने की कोशिश की जा रही है।