ओडिशा में विजिलेंस विभाग की छापेमारी में एक सरकारी इंजीनियर की कथित करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है। आय से अधिक संपत्ति मामले में अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है और जांच जारी है। ओडिशा में सरकारी इंजीनियर भुवनेश्वर साबर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 2018 के तहत मामला दर्ज किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 10.72 लाख रुपये की जमा राशि, एक कार, नकदी और लगभग 20 लाख रुपये की कीमत के घरेलू सामान भी जब्त किए हैं।

20 साल की उम्र में भुवनेश्वर साबर ने जब ओडिशा सरकार में जूनियर इंजीनियर के पद पर नौकरी ज्वॉइन की थी, तब उनकी तनख्वाह मात्र 6000 रुपये थी। लेकिन जब इस सप्ताह ओडिशा विजिलेंस विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची तो कथित संपत्ति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। आरोप है कि साबर के पास अब पांच बहुमंजिला इमारतें, 97 प्लॉटों में फैली 83 एकड़ जमीन, 17 एकड़ में बने दो फार्महाउस और एक मार्केट कॉम्प्लेक्स है।

आय से ज्यादा संपत्ति का मामला

इस सप्ताह राज्य विजिलेंस विभाग ने आय से अधिक संपत्ति (disproportionate assets) मामले में साबर से जुड़े कथित छह ठिकानों पर छापेमारी की। भुवनेश्वर साबर फिलहाल ओडिशा सरकार में कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) के पद पर है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 (Prevention of Corruption Act, 2018) के तहत साबर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 10.72 लाख रुपये की जमा राशि, एक चार पहिया वाहन, नकदी और लगभग 20 लाख रुपये मूल्य के घरेलू सामान भी जब्त किए हैं।

विभाग ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसकी टेक्निकल विंग साबर की संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही है। एक विजिलेंस अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”अधिकारी से संपत्तियों के स्रोत के बारे में पूछताछ की गई। लेकिन वह इतनी बड़ी संपत्ति जुटाने के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।”

1999 में 6000 रुपये की नौकरी

अधिकारियों के अनुसार, साबर ने साल 1999 में नौकरी ज्वॉइन की थी और उनकी पहली पोस्टिंग ओडिशा के कोरापुट जिले के सुनाबेड़ा स्थित सड़क एवं भवन (Roads and Buildings) विभाग में हुई थी। उन्हें 2013 में सहायक अभियंता (Assistant Engineer) और मार्च 2024 में कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) के पद पर प्रमोट किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, कालाहांडी जिले से ताल्लुक रखने वाले साबर को 2007 के बाद से अपने गृह जिले से बाहर ट्रांसफर नहीं किया गया जबकि इस दौरान उन्हें दो बार प्रमोशन भी मिला।

अधिकारियों ने बताया कि साबर की अधिकतर संपत्तियां कालाहांडी और नबरंगपुर जिलों में स्थित हैं जहां उनकी पहले पोस्टिंग रही थी। इस मामले की जांच अभी जारी है।

यह कार्रवाई ओडिशा सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। वर्ष 2025 में ओडिशा विजिलेंस ने 339 लोगों के खिलाफ 205 मामले दर्ज किए थे जिनमें 53 क्लास-I अधिकारी और 39 क्लास-II अधिकारी शामिल थे। इन 205 मामलों में आय से अधिक संपत्ति के 49 मामले और रिश्वत से जुड़े 98 ट्रैप केस शामिल थे।