SCB Hospital Fire News: कटक के SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार तड़के लगी भीषण आग के बाद अफरा-तफरी मच गई। ओडिशा के इस प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र में लगी आग में 10 लोगों की जान चली गई। इसके बाद अपने प्रियजनों को ढूंढ रहे रिश्तेदारों के फोन लगातार बजते रहे। आग लगने के बाद बचाए गए कई मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
SCB के ट्रॉमा केयर सेंटर की पहली मंजिल पर बने ICU में रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच आग लग गई। जिस समय यह घटना हुई, उस समय ICU में करीब 25 मरीज भर्ती थे। एससीबी की मोर्चुरी के बाहर इंतजार कर रहे अंगुल जिले के सुबरनपुर गांव के रूशब परिदा ने बताया कि पिछली रात डॉक्टरों ने उनके पिता के बारे में क्या कहा था। उनके पिता पिछले एक हफ्ते से आईसीयू में इलाज करवा रहे थे।
रूशब ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मेरे पिता को बैल के हमले में सिर में गंभीर चोटें आईं। लगभग एक हफ्ते के इलाज के बाद वे ठीक हो गए थे। पिछली शाम डॉक्टरों ने कहा था कि वे आज मेरे पिता को अस्पताल से छुट्टी दे देंगे। दुर्भाग्य से, आग में उनकी मृत्यु हो गई।” रुशब आग लगने के समय आईसीयू के बाहर फर्श पर सो रहा था। उसने बताया कि लगभग 2.40 बजे उसने चीखने की आवाजें सुनीं।
नर्सों ने हमें अंदर नहीं जाने दिया- रूशब
रुशब ने बताया, “नर्सें और सुरक्षाकर्मी हमें बाहर जाने के लिए चिल्ला रहे थे क्योंकि एक बिस्तर के पास आग लग गई थी। जब हमने आईसीयू में घुसने की कोशिश की, तो हमें घना धुआं दिखाई दिया और कोई भी नजर नहीं आया। नर्सों ने हमें अंदर नहीं जाने दिया। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी। कुछ देर बाद, मैंने अपने पिता को ढूंढा। सुबह हमें पता चला कि उनका शरीर पूरी तरह से जलकर राख हो गया था।”
जाजपुर के रहने वाली पुष्पलता पुहान ने भी अपने पिता को खो दिया, जिन्हें ब्रेन स्ट्रोक के कारण पांच दिनों तक आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया, “मेरे पिता की हालत ठीक थी और इलाज का उन पर अच्छा असर हो रहा था। वे खुद चलने लगे थे। हादसे के बाद मैंने उन्हें अलग-अलग वार्डों में ढूंढा, लेकिन वे नहीं मिले। जब मैं सुबह ट्रॉमा केयर सेंटर वापस आई और उनका आधार कार्ड दिखाया , तो स्टाफ ने मुझे मोर्चुरी जाने को कहा क्योंकि उनकी मृत्यु हो चुकी थी।”
एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाते दिखे परिजन
कई अन्य लोगों के रिश्तेदार अपने प्रियजनों का पता लगाने की कोशिश में लगातार एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाते रहे। अस्पताल के नर्सिंग और सुरक्षा कर्मचारी सबसे पहले मौके पर पहुंचे और उन्होंने जलते हुए आईसीयू से मरीजों को अपने कंधों पर उठाकर बाहर निकाला। मरीजों को बचाने और आग पर काबू पाने की कोशिश में अस्पताल के लगभग 11 कर्मचारी झुलस गए। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है।
नाम न बताने की शर्त पर एक सिक्योरिटी गार्ड ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि स्प्रिंकलर सिस्टम खराब हो गया था। उन्होंने कहा, “हमने ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कई लोगों की मौत हो गई।” प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग मुख्य रूप से पहली मंजिल पर स्थित आईसीयू तक ही सीमित थी, लेकिन घना धुआं अन्य मंजिलों तक फैल गया, जिससे कर्मचारियों को विभिन्न वार्डों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा। कर्मचारियों ने बताया कि फायर टेंडर को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट लगे, जबकि फायर स्टेशन एससीबी परिसर के अंदर ही मौजूद था।
मुख्यमंत्री मांझी ने अस्पताल का दौरा किया
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए सुबह-सुबह अस्पताल का दौरा किया। आग में 10 लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये प्रति परिवार की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने इस घटना की न्यायिक जांच के भी आदेश दिए। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पताल में ही डेरा डालने के लिए कहा गया है ताकि घायलों का सही इलाज सुनिश्चित किया जा सके और स्थिति को संभाला जा सके। आग लगने के कारण का पता लगाने, खामियों की पहचान करने और सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए हाई लेवल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
