सुबह के 7 बजने से पहले ही 25 साल की सर्मिष्ठा साहू अपने दिन की शुरुआत कर देती हैं। ओडिशा के खुर्दा जिले के बनमालीपुर गांव जाने से पहले वो पूरी तैयारी कर लेती हैं। यानी बैग में दो पानी की बोतलें, कुछ ओआरएस के पैकेट, जरूरी कागजात और जनगणना विभाग से मिली एक कैप। तेज धूप और गर्मी से लड़ने के लिए ये सब उनके रोज के साथी हैं।
सर्मिष्ठा बताती हैं, “जब देश में पिछली जनगणना हुई थी, तब मैं सिर्फ 10 साल की थी। अब इस काम का हिस्सा बनना अच्छा लगता है। 15 मई तक सर्वे पूरा करने का दबाव है, लेकिन यह राष्ट्रीय जिम्मेदारी है, और हमें इसे करना ही है।”
दरअसल, सर्मिष्ठा एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में असिस्टेंट टीचर हैं, लेकिन इन दिनों वो जनगणना की गणनाकर्मी (एन्यूमरेटर) के तौर पर काम कर रही हैं। 16 अप्रैल से शुरू हुए जनगणना 2027 के पहले चरण में देशभर में 1 लाख से ज्यादा एन्यूमरेटर घर-घर जाकर इमारतों और सुविधाओं का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।
बनमालीपुर बाजार में स्कूटी खड़ी करने के बाद सर्मिष्ठा अपना काम शुरू करती हैं। हर घर के बाहर वो मुस्कुराकर आवाज लगाती हैं – “कोई है क्या, हम जनगणना से आए हैं।” इसके बाद शुरू होते हैं उनके तय 33 सवाल – घर में कौन रहता है, क्या अनाज इस्तेमाल होता है, इंटरनेट है या नहीं, मोबाइल-लैपटॉप है या नहीं, पीने का पानी मिलता है या नहीं, शौचालय कैसा है, घर अपना है या किराए का, एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं।
उनके जिम्मे 256 इमारतों में बने 430 घरों का सर्वे है। हर घर में करीब 7 से 10 मिनट लगते हैं। कुछ लोग उन्हें अंदर बुलाकर पानी पिलाते हैं, तो कुछ दरवाजे से ही जवाब देकर जल्दी छुटकारा चाहते हैं। कई लोग सवाल भी करते हैं – “मोबाइल नंबर क्यों चाहिए? इससे हमें क्या फायदा होगा?” गांव में जागरूकता कम होने की वजह से लोग कई बार जानकारी देने में हिचकिचाते हैं, लेकिन सर्मिष्ठा हर सवाल का जवाब धैर्य से देती हैं।
वो सारी जानकारी मोबाइल ऐप में दर्ज करती हैं, लेकिन यहां भी चुनौतियां हैं। अगर कोई घर बंद मिलता है या लोग बाद में आने को कहते हैं, तो ऐप उन्हें अगले घर पर जाने नहीं देता। ऐसे में वो नोट बनाकर बाद में डेटा भरती हैं और अगले दिन फिर लौटती हैं। कई बार ऐप भी हैंग हो जाता है।
सुबह 9 बजे के आसपास वो थोड़ा पानी पीकर अपने सुपरवाइजर से बात करती हैं और फिर प्रधानपटना गांव की ओर बढ़ती हैं। वहां एक घर पर छोटी बच्ची कहती है कि बाद में आना, तो दूसरे घर में महिला जवाब देती है। हर जगह अलग अनुभव मिलता है।
धूप की वजह से 11 बजे से 3 बजे के बीच काम न करने के निर्देश
इस बीच, हाल ही में कुछ जगहों पर एन्यूमरेटर की हीटस्ट्रोक से मौत और महिला कर्मियों के साथ बदसलूकी की खबरें भी आई हैं। इसके बाद सरकार ने निर्देश दिए हैं कि दोपहर 11 से 3 बजे के बीच काम न किया जाए। सर्मिष्ठा मानती हैं कि ये खबरें परेशान करती हैं, लेकिन उनके साथ अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।
करीब 11 बजे, जब तापमान 35 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है, वो दिन का काम खत्म कर देती हैं। सर्मिष्ठा कहती हैं, “जनगणना देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है। सही जानकारी जुटाने में हमारी बड़ी भूमिका है, और हमें खुशी है कि हम इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।”
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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया हो, लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव हों या फिर जनगणना जैसे विशेष अभियान, इनका जिम्मा शिक्षकों तथा अन्य विभागीय कर्मियों को दिया जाता है। उन्हें बिना किसी त्रुटि या हड़बड़ी के पूरी सटीकता के साथ इस कार्य को अंजाम देना होता है। मगर इस दौरान उन्हें किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, इस पर शायद ही सरकार और प्रशासनिक स्तर पर पहले कोई चर्चा होती हो या कोई समाधान तलाशने की कोशिश की जाती हो। यानी परिस्थिति जो भी हो, इन कर्मियों को हर हाल में काम पूरा करना होता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
