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11 साल बची थी IAS की नौकरी, छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुईं अपराजिता सारंगी, 2019 में लड़ सकती हैं चुनाव

साल 2019 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा के चुनावों से पहले ये भाजपा का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अपराजिता, साल 2006 से लेकर साल 2009़ तक भुवनेश्वर नगर निगम की कमिश्नर रही हैं।

भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह के साथ पूर्व आईएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी। फोटो- ANI

पूर्व आईएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी ने 27 नवंबर को भाजपा में शामिल होकर अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरूआत कर दी है। अपराजिता सारंगी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के घर पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुईं। बिहार की रहने वाली अपराजिता सारंगी 1994 बैच की ओडिशा काडर की आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने पांच साल तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 15 नवंबर को ही उनके आवेदन को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने भी इसकी सहमति दे दी थी।

पूर्व आईएएस अपराजिता को भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने में अभी 11 साल बाकी थे। आखिर किस बात ने उन्हें नौकरशाही छोड़कर राजनेता बनने के लिए प्रेरित किया? इस सवाल के जवाब में अपराजिता ने मीडिया को बताया कि वह जनसेवा करना चाहती हैं।

वैसे बता दें कि ये माना जा रहा है कि भाजपा, अपराजिता सारंगी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है। साल 2019 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा के चुनावों से पहले ये भाजपा का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अपराजिता, साल 2006 से लेकर साल 2009़ तक भुवनेश्वर नगर निगम की कमिश्नर रही हैं। वह अपने कामों के कारण जनता के बीच में भी खासी लोकप्रिय हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी भुवनेश्वर लोकसभा सीट से उन्हें चुनाव लड़वा सकती है। संभावना ये भी है कि पार्टी उन्हें भुवनेश्वर की तीन विधानसभा सीट में से किसी एक से उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दे।

अपराजिता बिहार की रहने वाली हैं। उन्होंने अपने बैचमेट संतोष सारंगी से शादी की है। संतोष सारंगी, वर्तमान में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय में बतौर संयुक्त सचिव तैनात हैं। अपराजिता ने ओडिशा सरकार में अपने कामकाज के दौरान कई विभागों जैसे स्कूल और लोक शिक्षा, उच्च शिक्षा, कपड़ा और हस्तशिल्प और पंचायती राज जैसे विभागों में सचिव के पद पर रहकर महत्वपूर्ण काम किया है।

साल 2013 में, अपराजिता सारंगी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली आ गईं। उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग में बतौर संयुक्त सचिव मनरेगा योजना पर भी काम किया है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उनका पांच साल का कार्यकाल अगस्त में पूरा हो गया था। इसके बाद उन्होंने स्वैच्छि​क सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था।

अपराजिता के भाजपा में शामिल होने पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने मिली—जुली प्रतिक्रिया दी है। टीओआई से बातचीत में केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री जुआल ओराम ने कहा कि उनके भाजपा में शामिल होने से सकारात्मक संदेश गया है। इससे पार्टी को ओडिशा में लाभ मिलेगा। वह हमारे लिए धरोहर की तरह हैं।

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