‘पीएम मोदी और अमित शाह को करें आगाह, क्रीमीलेयर इनकम से न करें छेड़छाड़’, संसदीय समिति के चीफ ने बीजेपी के ओबीसी सांसदों को लिखी चिट्ठी

पीएम मोदी को छोड़ संसद के दोनों सदनों के 112 ओबीसी सांसदों को 5 जुलाई को लिखे पत्र में सिंह ने कहा है कि उनकी संसदीय समिति ने सिफारिश की थी कि क्रीमी लेयर की सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया जाए।

PM MODI AND AMIT SHAH
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह। (PTI photo)

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कल्याण से जुड़ी संसदीय समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद गणेश सिंह ने पार्टी के अन्य ओबीसी सांसदों को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे सभी मैसेज या ट्वीट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को आगाह करें कि क्रीमीलेयर की इनकम में कोई छेड़छाड़ न करें। बीजेपी सांसद ने अन्य सांसदों से अनुरोध किया है कि ओबीसी वर्ग के लोगों की कुल इनकम में सैलरी और खेती से आय को परिवार की कुल आय में न जोड़ने की अपील पीएम और एचएम से करें।

सिंह का पत्र ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने क्रीमीलेयर की आय सीमा बढ़ाने और वेतन को एक मानदंड के रूप में शामिल करने के केंद्र के प्रस्ताव पर अपने विचार को अंतिम रूप देने वाला है। पीएम मोदी को छोड़ संसद के दोनों सदनों के 112 ओबीसी सांसदों को 5 जुलाई को लिखे पत्र में सिंह ने कहा है कि उनकी संसदीय समिति ने सिफारिश की थी कि क्रीमीलेयर की सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया जाए। उन्होंने लिखा कि सरकार 12 लाख रुपये पर “आम सहमति” पर विचार कर रही है, लेकिन सकल वार्षिक आय में वेतन और कृषि आय को भी जोड़ा जा रहा है, जो गलत है।

वर्तमान में, ओबीसी क्रीमीलेयर की आय सीमा 8 लाख रुपये प्रति वर्ष है, और यह सरकारी कर्मचारियों के वेतन नहीं बल्कि उनके रैंक पर तय किया जाता है कि वो परिवार क्रीमीलेयर के दायरे में आता है या नहीं। संसदीय पैनल के चीफ ने पार्टी सांसदों को पत्र में लिखा है, “प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी से आग्रह है कि वेतन और कृषि से हुई आय को सकल वार्षिक आय की गणना करते समय ना जोड़ा जाय। ऐसा संदेश, मैसेज, ट्वीट भेजने का कष्ट करें।”

पैनल के चीफ, जो मध्य प्रदेश के सतना से सांसद है, ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि पार्टी सांसदों को ऐसी चिट्ठी लिखने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का प्रस्ताव पारित हो जाता है तब सरकारी नौकरियों में ओबीसी का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एक कैबिनेट नोट का मसौदा – जिसमें कहा गया है कि क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय आयकर के लिए गणना की गई वेतन को शामिल किया जाय लेकिन कृषि आय नहीं – सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 12 मार्च को ही NCBC को भेज दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि संवैधानिक दर्जा प्राप्त पिछड़ा वर्ग आयोग के पांच सदस्यों में से चार भी क्रीमीलेयर में वेतन और कृषि से आय को शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।

जब NCBC के अध्यक्ष भगवान लाल साहनी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा: “हम कैबिनेट नोट में प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हम एक हफ्ते में सरकार को अपने विचार अंतिम रूप देंगे और भेज देंगे।”

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