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पठानकोट हमले के शहीदों की कहानी: एक दिन पहले ही हुई थी जगदीश चांद की तैनाती, जानें कई और बातें

स्‍थानीय लोगों का कहना है कि निरंजन अपने इलाके में बेहद मशहूर थे। वे बहुत मिलनसार स्‍वभाव के थे।

शहीद लेफ्ट‍िनेंट कर्नल निरंजन कुमार (SOURCE: FACEBOOK )

पठानकोट में एयर फोर्स बेस कैंप पर हुए आतंकी हमले में भारत मां के कई लाल अभी तक वतन पर अपनी जान न्‍योछावर कर चुके हैं। इनके नाम हैं- कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में गोल्‍ड मेडल जीत चुके फतेह बहादुर सिंह, गरुण कमांडो गुरसेवक सिंह, हवलदार कुलवंत सिंह, जवान जगदीश सिंह, निरंजन कुमार और संजीव कुमार हैं। इन सभी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बहादुरी के साथ आतंकियों का सामना किया। आइए जानते हैं इन्‍हीं सपूतों की कहानी…

जगदीश चांद: चंबा (हिमाचल प्रदेश) के रहने वाले 58 साल के जगदीश चांद ने शनिवार को पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकियों का सामना सबसे पहले किया था। आतंकी की गोली का शिकार होने से पहले उन्‍होंने एक आतंकी को ढेर कर दिया था। चांद रिटायर्ड फौजी थे। रिटायरमेंट के बाद उन्‍हें डिफेंस सिक्‍योरिटी कॉर्प्‍स (डीएससी) में बहाल किया गया था। दिसंबर में लेह से उनका तबादला किया गया था और उन्‍होंने पहली जनवरी को ही पठानकोट में ड्यूटी जॉइन की थी। चांद फौजी परिवार से थे। उनके पिता और कई करीबी रिश्‍तेदार भारतीय सेना में रह चुके हैं और अभी भी काम कर रहे हैं। उनके परिवार में पत्‍नी स्‍नेहलता और तीन बच्‍चे हैं। उनकी बेटियों के नाम किरण और तमन्‍ना हैं। बेटा रजत है।

हवलदार कुलवंत सिंह: 49 साल के कुलवंत सिंह 20 साल भारतीय सेना में रहे और 11 साल से डिफेंस सिक्‍योरिटी कॉर्प्‍स (डीएससी) में थे। 30 साल में पहली बार उनके गृह राज्‍य पंजाब में उनकी पोस्टिंग हुई थी। वह गुरदासपुर जिले के चाक शरीफ गांव के रहने वाले थे। पत्‍नी हरभजन कौर बताती हैं कि पठानकोट में तैनाती के बाद उन्‍हें परिवार के करीब रहने की काफी खुशी थी। 24 से 28 दिसंबर तक घर पर छुट्टी बिता कर वह पठानकोट लौटे थे। हरभजन ने बताया कि इस बार छुट्टी के दौरान उन्‍होंने अपनी पोस्‍टर साइज फोटो बनवाई और कहा था कि इसे साथ रखूं। अब उसी तस्‍वीर पर उन्‍हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।

कुलवंत ने 1985 में 19 साल की उम्र में सेना जॉइन की थी। 2004 में रिटायरमेंट के बाद वह डीएससी में चले गए थे। उनके दो बेटे हैं। एक बारहवीं में पढ़ता है और दूसरा छठी में। वह गांव में पक्‍का घर बनवा रहे थे। उनकी बहन जसविंदर कौर ने बताया कि घर अभी अधूरा ही है। चार भाई-बहनों में से कुलवंत इकलौते थे जिन्‍होंने सेना की नौकरी की। पर वह अपने बड़े बेटे को सेना में अफसर बनाना चाहते थे।

एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार: निरंजन केरल के रहने वाले थे। उनके परिवार में पत्‍नी के अलावा एक दो साल का बच्‍चा है। निरंजन के माता पिता केरल के ही हैं, लेकिन फिलहाल बेंगलुरु में रहते हैं। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि निरंजन अपने इलाके में बेहद मशहूर थे। वे बहुत मिलनसार स्‍वभाव के थे। उनके रिश्‍तेदार हरिकृष्‍ण ने बताया कि वह सितंबर में घरवालों से मिलने आए थे। निरंजन एनएसजी के बम निरोधक दस्‍ते के मेंबर थे। मुठभेड़ में मारे गए एक आतंकी के शरीर में बंधे विस्‍फोटक को डिफ्यूज करते वक्‍त धमाका हो गया, जिसमें उनके समेत तीन लोग घायल हो गए। बाद में अस्‍पताल में निरंजन की मौत हो गई।

शहादत देने वालों में कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में गोल्‍ड मेडल जीत चुके फतेह बहादुर सिंह, गरुण कमांडो गुरसेवक सिंह, जवान जगदीश सिंह और संजीव कुमार भी हैं। गुरसेवक अंबाला के रहने वाले थे। उनकी एक महीने पहले ही शादी हुई थी। वहीं, चैंपियन शूटर सूबेदार फतेह सिंह की दो साल पहले पठानकोट में पोस्‍ट‍िंग हुई थी।

 

 

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