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NSA डोभाल ने की ‘स्थिर’ सरकार की सिफारिश, कहा- 10 साल और दो

उन्होंने कहा कि ‘कमजोर गठबंधन देश के लिए बुरा होगा।’ उन्होंने यहां सरदार पटेल व्याख्यान देते हुए दावा किया कि पिछले चार सालों में देश की ‘राष्ट्रीय इच्छाशक्ति’ जागृत हुई है।

Author October 26, 2018 10:01 AM
‘कमजोर लोकतंत्र में देश की ताकत को कमजोर बनाने की प्रवृत्ति होती है।’ (फोटो सोर्स : Indian Express)

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत को अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अगले दस सालों तक एक मजबूत, स्थायी और निर्णायक सरकार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘कमजोर गठबंधन देश के लिए बुरा होगा।’ उन्होंने यहां सरदार पटेल व्याख्यान देते हुए दावा किया कि पिछले चार सालों में देश की ‘राष्ट्रीय इच्छाशक्ति’ जागृत हुई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने यह भी कहा कि भारत को चौथी पीढ़ी के युद्धकौशल की तैयारी करनी चाहिए जहां ‘अदृश्य दुश्मनों’ से लोहा लेना पड़ सकता है। उन्होंने ‘‘स्वप्न भारत 2030 : अड़चनों को नकाराते हुए’’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि उन्नत हथियार और विशाल सेना रखना ही लड़ाइयां जीतने के लिए काफी नहीं हो सकती है क्योंकि प्रौद्योगिकी एक अहम भूमिका निभा सकती है।
रक्षा उपकरण में शत प्रतिशत प्रौद्योगिकी अंतरण की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने झूठी बातें गढ़ने के विरुद्ध चेताया। उन्होंने कहा कि यह उन बड़े कारकों में है जो देश की ताकत को क्षीण कर सकते हैं।
डोभाल ने कहा कि कोई भी देश जबतक अपने निजी क्षेत्र को मजबूत नहीं करता, वह प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट प्रतिष्ठानों को सदैव तिरस्कार की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि वे भी देश की प्रगति में सकारात्मक योगदान देते हैं और इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। अत: उनका समर्थन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र भारत की ताकत है और उसे संरक्षित रखने की जरुरत है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि कमजोर लोकतंत्र में देश की ताकत को कमजोर बनाने की प्रवृत्ति होती है। भारत अगले कुछ वर्षों तक ताकत के लिहाज से कमजोर होना बर्दाश्त नहीं कर सकता। उसे कठोर निर्णय करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि यदि वह ताकत की दृष्टि से कमजोर हुआ तो आपको समझौते करने होंगे। जब आपको समझौते करते पड़ते हैं तो आपका राजनीतिक अस्तित्व राष्ट्रहित से ऊपर हो जाता है। ’’ उन्होंने कहा कि खंडित राजनीति भारत के लिए उसकी इच्छाशक्ति को साकार करना असंभव बना देगी क्योंकि कमजोर सरकारें कठोर निर्णय लेने में असमर्थ होती हैं।

डोभाल ने कहा कि भारत को आगे ले जाने के लिए कठोर निर्णय लेने जरूरी होंगे। ऐसे निर्णय लोगों के लिए अच्छे तो होंगे किन्तु आवश्यक नहीं है कि वे लोकप्रिय भी हों।

उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में कोई संदेह नहीं हो कि भारत को अपने राष्ट्रीय, राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए अगले दस सालों तक मजबूत, स्थिर और निर्णायक सरकार की जरूरत होगी ।’’ उन्होंने आकाशवाणी द्वारा आयोजित इस व्याख्यान में कहा कि कमजोर गठबंधन देश के लिए बुरे होंगे। उन्होंने कहा कि अस्थिर शासन के बिखरने एवं भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का जोखिम अधिक रहता है। साथ ही स्थानीय राजनीतिक हित व्यापक हितों पर हावी हो जाते हैं।

अपने भाषण में डोभाल ने ब्राजील का उदाहरण दिया जो वैश्विक स्तर पर तो अच्छा कर रहा है लेकिन राजनीतिक अस्थिरता उसकी वृद्धि बाधित कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत अस्थिर गठबंधनों का जोखिम नहीं ले सकता। ’’ उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत को निर्णायक सरकार और निर्णायक नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने धार्मिक प्रतिबद्धता के साथ कानून के शासन पर कायम रहने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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