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एनआरएचएम घोटाला: टेलिमेडिसिन परियोजना का ठेका दिया गया निर्माण कंपनी को

सीबीआई ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कंपनी ने नौ करोड़ रुपए से अधिक की परियोजना का काम कथित रूप से एक छोटी कंपनी को सौंपा
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 14:06 pm
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ)

सीबीआई ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण उच्च तकनीक वाली टेलीमेडिसिन परियोजना का ठेका एक निर्माण कंपनी को देने के लिए कथित तौर पर सांठगांठ की। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कंपनी ने नौ करोड़ रुपए से अधिक की परियोजना का काम कथित रूप से एक छोटी कंपनी को सौंपा, जिससे राजकोष को तीन करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया है कि नेशनल को-ऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) द्वारा दिए जाने वाला ठेका अंजानेया बिजनेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया जो कथित तौर पर सिविल निर्माण के क्षेत्र में काम करती है। इस कंपनी को टेलिमेडिसिन परियोजना के संचालन का कोई अनुभव नहीं था, जिसमें नवीनतम दूरसंचार तकनीक में विशेषज्ञता की दरकार होती है। इस टेलिमेडिसिन परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के दस जिलों के मरीज और डॉक्टर संजय गांधी स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान की मदद से संचार के साधनों द्वारा सुपर स्पेशियलिस्टों से संपर्क कर सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि घोटाले की तीन वर्ष की जांच के बाद सीबीआई ने हाल ही में गाजियाबाद की विशेष अदालत में इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें एनसीसीएफ के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक ए के सक्सेना 9फिलहाल आरडीएसओ में पदस्थापित), उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा के तत्कालीन महानिदेशक एम सी शर्मा (वर्तमान में अवकाशप्राप्त), उत्तर प्रदेश सरकार में तत्कालीन संयुक्त सचिव राम कुमार प्रसाद (वर्तमान में सेवानिवृत्त), अंजानेया बिजनेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रशांत सक्सेना और कंपनी को आरोपी बनाया है।

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