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कोरोना, लॉकडाउन की मार के बाद MGNREGS की 181% बढ़ी डिमांड! युवा भी जमकर मांग रहे काम; 31.1% लोग 31-40 आयुवर्ग के

यह वृद्धि तब हुई है जब, कोरोना संक्रमण फैलने के मद्देनजर कड़े लॉकडाउन के दौरान असंख्य लोगों की नौकरी चली गई थी। नतीजतन श्रमिक ट्रेनें चलने के बाद प्रवासी मजदूर, कामगार और श्रमिक महानगरों से लौटकर गृह राज्यों को आए, तो उन्होंने गुजर-बसर के लिए MGNREGS से जुड़े कामों की ओर रुख किया।

Coronavirus, COVID-19, Lockdown, MGNREGS, MGNREGA, NREGS, Youth, Migrants, Labours, India News, National News, Hindi NewsMGNREGS के तहत सिर पर तसले में मलबा ढोते ले जाती महिला। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः आनंद सिंह)

Coronavirus/COVID-19 संकट और Lockdown की मार के बाद Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGS) से जुड़े कामों की डिमांड में उछाल आया है। अप्रैल में इसके तहत 12,841,359 परिवारों ने काम मांगा, जबकि मई में इसमें 181 फीसदी का उछाल आया और MGNREGS के तहत काम मांगने वाले परिवारों की संख्या बढ़कर 36,155,787 हो गई।

यह वृद्धि तब हुई है जब, कोरोना संक्रमण फैलने के मद्देनजर कड़े लॉकडाउन के दौरान असंख्य लोगों की नौकरी चली गई थी। नतीजतन श्रमिक ट्रेनें चलने के बाद प्रवासी मजदूर, कामगार और श्रमिक महानगरों से लौटकर गृह राज्यों को आए, तो उन्होंने गुजर-बसर के लिए MGNREGS से जुड़े कामों की ओर रुख किया।

यही वजह है कि अब युवा भी MGNREGS के तहत काम चाहते हैं और वे ऐसा कर भी रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 9.82 फीसदी लोग 18 से 30 बरस के बीच के हैं। 31.14 प्रतिशत लोग 31 से 40 साल के हैं। 30.03 फीसदी लोग 41 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के हैं। 19.27 प्रतिशत लोग 51-60 साल के बीच हैं। 9.39 प्रतिशत लोग 61 से 80 के बीच हैं, जबकि 0.35 लोग 81 साल के ऊपर के हैं।

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MGNREGS डैशबोर्ड के मुताबिक, जून के पहले हफ्ते में 19,626,060 परिवारों ने काम मांगा। ऐसे में माना जा रहा है कि महीना बीतने के साथ इस संख्या में अच्छा-खासा इजाफा होगा, क्योंकि फसल का मौसम गुजर चुका है। साथ ही नौकरी-काम खो चुके इन लोगों के लिए मुश्किल ही है कि ये दोबारा अपनी कार्यस्थलों पर लौट पाएं।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट में इस बाबत एक अफसर के हवाले से बताया गया कि MGNREGS के तहत अब तक परिवार की महिलाएं और बुजुर्ग ही राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करते थे, जबकि उनके घर के युवा पुरुष अधिक पगार की चाह में शहरों का रुख कर पलायन कर जाते थे। कोरोना, लॉकडाउन के बाद इस साल इस पैटर्न में हम काफी बदलाव देख रहे हैं।

हालांकि, सरकार की इस योजना को भीषण भ्रष्टाचार का शिकार बनने की वजह से कभी राजनेताओं की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था, पर मौजूदा समय में (खासकर कोरोना, लॉकडाउन और ग्रामीण कृषि संकट) यह स्कीम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब लोगों के मुख्य आय का स्रोत बनकर उभरी है।

बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, ओडिशा, पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्त प्रदेश सरीखे सूबों में मनरेगा से जुड़े काम को लेकर भारी मांग सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र और राजस्थान के बड़े हिस्सों को लॉकडाउन के दौरान खोला गया, जहां MGNREGS से जुड़े कार्य को मंजूरी दी गई, जबकि अन्य राज्यों में भी बड़े स्तर पर प्रवासियों की गृह राज्य वापसी हुई।

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