रिपोर्ट में दावा- कर्मचारियों की छंटनी आसान कराने वाला लेबर कोड लोकसभा में पेश करेगी मोदी सरकार

यही नहीं, केंद्र ने उस धारा को भी बरकरार रखा है, जिसके अंतर्गत 100 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को तालाबंदी और छंटनी पर सरकार से अनुमति लेनी होगी।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: November 26, 2019 10:25 PM
हरियाणा और महाराष्ट्र विदानसबा चुनाव परिणाम के रुझान बीजेपी की टेंशन बढ़ा रहे हैं। फोटो- पीटीआई

आगामी दिनों में लेबर यूनियनों के लिए हड़ताल पर जाना मुश्किल हो सकता है। साथ ही कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार बुधवार (27 नवंबर, 2019) को संसद के निचले सदन लोकसभा में लेबर कोड पेश करेगी।

‘The Print’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नए लेबर कोड से जुड़े प्रस्ताव के तहत किसी भी कर्मचारी के तय कार्यकाल की सेवा समाप्ति के बाद उसे छंटनी का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

बिल में यह भी प्रस्ताव है कि ट्रेड यूनियन को Sole Negotiating Union तभी माना जाएगा, जब उसके पास वहां के 75% या उससे अधिक कर्मचारियों का समर्थन होगा, जबकि पहले इसके लिए बिल के अंतर्गत 66 फीसदी कर्मचारियों का समर्थन यूनियन को चाहिए होता था।

नई श्रेणी बेनगा Fixed-Term Employment: बिल में प्रस्ताव है कि बड़े स्तर पर होने वाली कैजुअल लीव को ‘हड़ताल’ (Strike) माना गया है, जिस पर (हड़ताल/लॉकआउट) जाने से 14 दिन पहले सूचना देना जरूरी होगा। कहा जा रहा है कि इस बिल के तहत पक्का रोजगार (फिक्स्ड टर्म एंप्लॉयमेंट) नई श्रेणी में रहेगा।

Hiring-Firing होगी आसान: कहा जा रहा है कि इस कोड के जरिए कर्मचारियों की नियुक्ति और उन्हें हटाने की प्रक्रिया कंपनियों के लिए काफी सरल हो जाएगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 20 नवंबर को संसद में Industrial Relations Code, 2019 को लाने को लेकर मंजूरी दी थी।

क्या है इस नए लेबर कोड का उद्देश्य?: इस कोड का मकसद तीन केंद्रीय श्रमिक अधिनियमों – The Trade Unions Act, 1926, The Industrial Employment (Standing Orders) Act, 1946 और The Industrial Disputes Act, 1947 – को आसान बनाने के साथ इन्हें मर्ज करने का है।

बता दें कि यह कोड जून में दिए गए एक फैसले का विस्तार है, जिसमें श्रम मंत्रालय ने 44 श्रम कानूनों को चार कोड्स में तब्दील करने का फैसला लिया था। इन चार में Industrial Relations, Wages, Social Security and Safety, Health and Working Conditions.

सीटू ने बताया- सरकार का घातक कदमः इसी बीच, मंगलवार को समाचार एजेंसी ‘वार्ता’ ने बताया कि सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने केंद्र के 44 श्रम कानूनों को चार लेबर कोड बिल में बदलने के प्रयास को घातक और मजदूरों को दासता की ओर धकेलने वाला करार दिया।

हरियाणा के सिरसा में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन के तीसरे और आखिरी दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर के हेमलता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश-विदेश के मालिकों को मजदूरों के श्रम की लूट की छूट देने के लिए श्रम कानूनों में मालिक परस्त बदलाव कर रही है।

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