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NSG के पास अब दुनिया का सबसे छोटा ‘स्‍पाई कैमरा’, कुछ सेकेंड में ही दुश्‍मन को तबाह करने में सक्षम!

ब्लैक हॉर्नेट नैनो नाम के इस ताकतवर ड्रोन को नॉर्वे के प्रॉक्स डायनामिक्स ने विकसित किया है। भारत के अलावा इस ड्रोन का उपयोग अमेरिका, फ्रांस, युनाइटेड किंगडम, जर्मनी, आॅस्ट्रेलिया और नीदरलैंड की सेनाएं करती हैं।

आतंकवाद विरोधी बल एनएसजी के ‘ ब्लैक कैट ’ कमांडो

देश की सबसे घातक कमांडो फोर्स मानी जाने वाली नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (एनएसजी) को अब नए हथियारों और गैजेटस से लैस किया जा रहा है। फिर बात चाहें सेमी आॅटोमैटिक स्नाइपर रायफल की हो या फिर दुनिया के सबसे छोटे खुफिया कैमरे की, एनएसजी अब इन सभी सुविधाओं से लैस होगी। दुनिया का सबसे छोटा खुफिया ड्रोन ब्लैक हॉर्नेट का आकार सिर्फ चार इंच का ही होता है। लेकिन आकार इस बात को तय नहीं करता है कि वह कितना घातक है। खिलौने जैसा दिखने वाला ये ड्रोन एनएसजी के हथियारखाने का सबसे घातक हथियार है। इस ड्रोन में दुश्मन को कुछ ही सेकेंड के भीतर मार गिराने की ताकत है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस ड्रोन में उच्च तकनी​की क्षमता वाले तीन कैमरे लगे हैं। ब्लैक हॉर्नेट खुफिया ड्रोन कमांडो की आगे आने वाले किसी भी खतरे को पहचानने में मदद करेगा। इस नैनो ड्रोन का वजन सिर्फ 16 ग्राम है जबकि इसकी रफ्तार 35 किमी प्रति/घंटा है। ये ड्रोन जीपीएस तकनी​की से लैस है और इसमें खुद से उड़ान भरने की क्षमता है।

ब्लैक हॉर्नेट नैनो नाम के इस ताकतवर ड्रोन को नॉर्वे के प्रॉक्स डायनामिक्स ने विकसित किया है। भारत के अलावा इस ड्रोन का उपयोग अमेरिका, फ्रांस, युनाइटेड किंगडम, जर्मनी, आॅस्ट्रेलिया और नीदरलैंड की सेनाएं करती हैं। ब्लैक हॉर्नेट, एनएसजी के पास अकेला ड्रोन नहीं है। 1984 में बनी एनएसजी को उसके 34वें स्थापना दिवस पर भारत में बना हुआ ड्रोन कमीकजे भी दिया गया था।

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में एनएसजी के निदेशक सुदीप लखटकिया ने कहा, ”भारत में बहुत प्रतिभा है। जब हम अपने लिए नए उपकरणों के बारे में तलाश कर रहे थे। हमने अपनी घरेलू प्रतिभाओं के साथ आगे बढ़ने के बारे में सोचा।” टेक्नोक्रेट और स्टार्टअप आंत्रप्रेन्योर ने एक साथ मिलकर स्किल इंडिया के तहत साथ मिलकर काम किया। सुरक्षा और गोपनीयता हमारी पहली प्राथमिकता थी।” उन्होंने कहा कि एनएसजी को हथियार युक्त ड्रोन देना उसे अपग्रेड करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा अब एनएसजी ड्रोन की तकनी​की में और सुधार लाने पर काम करेगी। ये ड्रोन सभी भू स्थितियों, सीमाओं और माध्यमों में काम कर सकेंगे। हम पानी के भीतर काम करने वाले ड्रोन पर भी विचार कर रहे हैं।

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