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अस्पताल और श्मशान में फ़र्क़ मिट गया है- कोरोना के कहर के बीच रवीश कुमार की टिप्पणी

NDTV के वरिष्ठ पत्रकार ने ये बातें ऐसे वक्त पर कहीं, जब देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। आलम यह है कि दवाओं और ऑक्सीजन से लेकर अस्पतालों में बेड्स की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। संक्रमण से मरने वालों की संख्या में इस कदर इजाफा हुआ कि श्मशान हो या कब्रिस्तान, वहां लाशें दफनाने के लिए जगह भी कम पड़ गई।

Manikarnika Ghat, Kashi, UPयूपी के वाराणसी में कोरोना से मरने वाले लोगों की लाशों को जलाते हुए मणिकर्णिका घाट पर डोम व अन्य कर्मचारी। (फोटोः पीटीआई)

कोरोना के कहर के बीच टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने कहा है कि धर्म की राजनीति का ध्वजारोहण देखती जनता, अस्पतालों के बाहर लाश में बदल रही है। अस्पताल और श्मशान में फर्क मिट गया है। दिल्ली और लखनऊ का फर्क मिट गया है। अहमदाबाद और मुंबई का फर्क मिट गया है। पटना और भोपाल का फर्क मिट गया है।

NDTV के वरिष्ठ पत्रकार की यह टिप्पणी 13 अप्रैल, 2021 को फेसबुक पोस्ट के रूप में आई थी। चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उन्होंने लिखा था, “अस्पतालों में जिन्हें आईसीयू की जरूरत है, उन्हें जनरल वॉर्ड भी नहीं मिल रहा। जिन्हें जनरल की जरूरत है, वे लौटा दिए जा रहे हैं। शवों को श्मशान ले जाने के लिए गाड़ियां नहीं मिल रही हैं।” गुजरात की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा- सूरत से ख़बर है कि विद्युत शवदाह गृह में इतने शव जले कि उसकी चिमनी पिघल गई। लोहे का प्लेटफार्म गल गया। श्मशान में लकड़ियां कम पड़ जा रही हैं। संवाददाता श्मशान पहुंच कर वहां आने वाले शवों की गिनती कर रहे हैं क्योंकि सरकारी आंकड़ों और श्मशान के आंकड़ों में अंतर है। सूरत के अलावा भोपाल और लखनऊ से भी ऐसी खबरें आ रही हैं।

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बकौल रवीश, “आम जनता लाचार है। उसकी संवेदना शून्य हो गई हैं। उसे समझ नहीं आ रहा है कि उसके साथ क्या हो रहा है। वो बस अपनों को लेकर अस्पताल जा रही है, लाश लेकर श्मशान जा रही है। जनता ने जनता होने का धर्म छोड़ दिया है। सरकार ने सरकार होने का धर्म छोड़ दिया है। मूर्ति बन जाती है। स्टेडियम बन जाता है। अस्पताल नहीं बनता है। आदमी अस्पताल के बाहर मर जाता है।”

COVID Hospital, Coronavirus, National News पंजाब के पटियाला स्थित राजेंद्र अस्पताल में आइसोलेशन वॉर्ड के बाहर इंतजार करते हुए कोरोना मरीजों के परिजन। (फोटोः पीटीआई)

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पत्रकार ने ये बातें ऐसे वक्त पर कहीं, जब देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। आलम यह है कि दवाओं और ऑक्सीजन से लेकर अस्पतालों में बेड्स की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। संक्रमण से मरने वालों की संख्या में इस कदर इजाफा हुआ कि श्मशान हो या कब्रिस्तान, वहां लाशें दफनाने के लिए जगह भी कम पड़ गई।

बता दें कि भारत में 24 घंटे में 2,61,500 कोरोना के नए मामले आए। रविवार सुबह नौ बजे जारी किए गए स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1,501 संक्रमितों की मौत हो गई, जबकि 1,38,423 लोगों को डिस्चार्ज किया गया। मौजूदा समय में देश में कुल केस- 1,47,88,109, एक्टिव केस- 18,01,316, कुल रिकवर किए गए केस- 1,28,09,643 और कुल मौतों- 1,77,150 हैं। साथ ही अब तक 12,26,22,590 लोगों को टीका दिया जा चुका है।

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