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नाम और डॉक्टर की ड्यूटी के अलावा कुछ भी नहीं बदला

सफदरजंग के बर्न आइसीयू में भर्ती उन्नाव पीड़िता ने शुक्रवार रात दम तोड़ दिया। इलाज में लगे डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह काफी बुरी हालत में थी।

सफदरजंग अस्पताल (फोटो सोर्स: ANI)

जघन्य बलात्कार झेलने वाली लड़कियां इतनी पीड़ा के बाद भी जीना चाहती थीं। लेकिन हमारा दर्द है कि हम उन्हें लाख कोशिशों के बाद भी बचा नहीं पाए। यह कहना है, सफदरजंग में पीड़ितों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का। सफदरजंग अस्पताल 16 दिसंबर दिल्ली गैंगरेप पीड़िता के अलावा ऐसी बर्बरता का शिकार हुई कितनी ही पीड़ितों की मौत का गवाह बन चुका है। यहां के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी घटनाओं पर लोगों के आक्रोश के बाद भी कहीं बदलता कुछ नहीं है सिवाय पीड़िता के नाम व डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर के।

सफदरजंग के बर्न आइसीयू में भर्ती उन्नाव पीड़िता ने शुक्रवार रात दम तोड़ दिया। इलाज में लगे डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह काफी बुरी हालत में थी। बलात्कार व जलने की असहनीय पीड़ा व जलन के इन पलों में भी वह जिंदगी से निराश नहीं थी, जीना चाहती थी। पर हमारी मजबूरी कि हम उसे बचा नहीं पाए। वह यहां जिस हालत में आई थी बचा पाना नामुमकिन था। वह 90 फीसद जल चुकी थी। जिसकी वजह से उसकी सांस की नली व खाने, बोलने की नली सूज गई थी। शरीर से बहुत फ्लूइड बह रहा था। वह बेसुध सी हालत में थी। वह कुछ कहना चाहती थी जो साफ समझ में तो नहीं आ रहा था लेकिन जितना समझ में आया उसके मुताबिक वह जीने की बात कह रही थी। उसे तुरंत वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया। सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुनील गुप्ता ने कहा कि वह साफ बोल नहीं पा रही थी। टूटी-फूटी व सांय-सांय करती आवाज में जितना सुनाई पड़ा उसमें यही समझ में आ रहा था कि वह जीना चाहती थी। पीड़िता के अखिरी शब्द थे कि वह बच तो जाएगी ना? ऐसी पीड़ा व ऐसी बर्बरता की शिकार हुई उन्नाव की बलात्कार पीड़िता की हालत पहले ही बेहद नाजुक थी उसके लिए अगले 48 घंटे भी निकाल पाना मुमकिन नहीं लग रहा था।

अस्पताल इससे पहले 16 दिसंबर दिल्ली गैंगरेप पीड़िता व दूसरी कई पीड़ितों को दम तोड़ते देख चुका है। दिल्ली गैंगरेप मामले में इलाज दल के अगुआ रहे एम्स के पूर्व निदेशक डॉक्टर एमसी मिश्र ने कहा कि जब दिल्ली गैंगरेप कांड हुआ था तो भी ऐसी ही बर्बरता का चरम देखने को मिला था। वह भी अखिरी दम तक जीने की अदम्य चाहत नहीं छोड़ पाई थी। मिश्र ने कहा कि किसी बीमारी से पीड़ित मरीज दर्द से हार कर निराश हो भी जाते हैं व जीने की आस व इच्छा ही छोड़ देते हैं। लेकिन इन पीड़ितों में इतनी बर्बरता झेलने के बाद भी निराशा नहीं दिखती। दिल्ली गैंगरेप पीड़िता ने भी कहा था कि वह जीना चाहती है। उन्होने बताया कि दिल्ली गैंगरेप कांड के समय उमड़े जनाक्रोश को देखते हुए हमने उसे यहां से सिंगापुर भेजने का फैसला लिया था। वर्ना हमारे यहां इलाज की ऐसी कोई सुविधा नहीं जो न हो। हम उसका यहां भी उसी तरह से इलाज कर सकते थे जैसा किसी भी दूसरे विकसित देश में होता। लेकिन हमारा दर्द था कि उसे बचा पाना मुमकिन नहीं। उस हालत में यहां उसके अंतिम पलों में या मौत की घोषणा पर जनसैलाब को संभालना मुमकिन नहीं होता। उन्होंने कहा कि लोगों के आंदोलन को देखते हुए लग रहा था कि हालात बदलेंगे लेकिन बदलता कुछ नहीं है। सिवा इसके कि दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की जगह कोई और होती है और इलाज करने वाले डॉक्टरों में तब कोई और व अब कोई और ड्यूटी पर है। रोज बलात्कार के नए मामले सामने आते ही जा रहे हैं।

प्रदर्शन कर रही महिला ने बच्ची पर डाला ज्वलनशील पदार्थ

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हुए बलात्कार के खिलाफ सफदरजंग अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रही एक महिला ने अपनी छह साल की भतीजी पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने की कोशिश की। हालांकि वक्त रहते उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया और बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल के ही इमरजेंसी वार्ड में भेज दिया।

उन्नाव की घटना के बाद मामले की पीड़िता की मौत हो जाने के बाद इसके विरोध में एक महिला सफदरजंग अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह नारे लगाते हुए कह रही थी कि जब कल मेरी बेटी का कोई बलात्कार कर देगा और उसे जिंदा जला तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ देगा। इससे अच्छा है कि वह आज ही मर जाए। महिला ने कहा कि बच्चियों का कोई हक बचा ही नहीं है कि देश में वह सुरक्षित महसूस करें। मेरे भाई की बच्ची है। वह नहीं चाहती कि किसी दरिंदे का शिकार उसकी भतीजी बने।

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