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एक रोहिंग्‍या परिवार को गोद लेना चाहते हैं जावेद अख्‍तर, ट्विटर पर एक शख्‍स से बोले- आप बहुत बीमार हैं

बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्‍तर ने एक रोहिंग्‍या परिवार को शर्तों के साथ गोद लेने की बात कही थी। इसको लेकर उनकी कड़ी आलोचना की जाने लगी। कई लोग उनसे विस्‍थापित कश्‍मीरी पंडितों के बारे में सवाल पूछने लगे।

मशहूर गीतकार जावेद अख्तर (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

बॉलीवुड के जानेमाने गीतकार जावेद अख्‍तर ने ट्विटर पर शर्तों के साथ एक रोहिंग्‍या परिवार को गोद लेने की इच्‍छा जताई थी। इसके बाद कई लोग उन्‍हें आड़े हाथ लेने लगे। जावेद अख्‍तर इससे इतना नाराज हो गए कि उन्‍होंने एक व्‍यक्ति से कहा कि आप बहुत बीमार हैैं। दरअसल, जावेद ने ट्वीट किया था, ‘मैं एक (रोहिंग्‍या) परिवार को गोद लेना चाहता हूं, लेकिन व‍ह परिवार भारत में कानूनी तौर पर रहने का हकदार हो। यदि सरकार उसे शरणार्थी का दर्जा देती है और वह कहां जाए इसका उसे खुद पता न हो तो मैं उसे आश्रय मुहैया कराऊंगा।’ जावेद अख्‍तर का यह ट्वीट सामने आते ही लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। इस पर अनिल कुमार आचार्य ने ट्वीट किया, ‘पाकिस्‍तान के ये दलाल कह रहे हैं कि कानूनी तौर पर शरणार्थी का दर्जा प्राप्‍त रोंहिग्‍या समुदाय के लोगों को केंद्र आश्रय उपलब्‍ध कराए। अवैध रूप से देश में रहने वाले रोहिंग्‍या को मामता बनर्जी, महबूबा मुफ्ती और अन्‍य के द्वारा शरण दिया जाएगा। …वाह जावेद भाई जवाब नहीं तुम्‍हारा।’

जावेद अख्‍तर ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई और ट्वीट किया, ‘आप जानते नहीं मगर आप बहुत बीमार हैं। इस बीमारी में इंसान की इंसानियत मर जाती है।’ उनके इस बयान के बाद सोशल साइटों पर प्रतिक्रियाओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। एक व्‍यक्ति ने लिखा, ‘चाचा इतनी हमदर्दी कश्‍मीरी पंडितों के लिए भी दिखाई होती तो आज वो कश्‍मीर से भगाए नहीं जाते…सिर्फ ट्विटर पर ज्ञान दे रहे हैं।’ दूसरे शख्‍स ने ट्वीट किया, ‘भारत ने जब भी मुसलमानों को अवैध तरीके से देश में रहने की अनुमति दी है, उसका परिणाम बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण रहा है। यहां तक कि सऊदी अरब भी रोंहिग्‍याओं को शरण नहीं दे रहे हैं।’ राणा निशांत सिंह ने ट्वीट किया, ‘ये आतंकियों का शरणगाह बनाने को कब से आतुर हैं। कभी कश्‍मीरी पंडितों को शरण दे देते जो भारतीय भी हैं।’बता दें कि म्‍यांमार में सैन्‍य कार्रवाई के बाद लाखों की तादाद में रोहिंग्‍या समुदाय के लोगों को विस्‍थापित होना पड़ा है। बांग्‍लादेश के अलावा भारत में भी हजारों की तादाद में रोहिंग्‍या शरणार्थियों ने शरण ले रखी है। भारत उन्‍हें औपचारिक तौर पर शरणार्थी का दर्जा देने के पक्ष में नहीं है। इस मसले पर पड़ोसी देश से भी बात की गई है। इसके अलावा केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को भी इससे अवगत कराया है।

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