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राफेल डील में नया खुलासा: रक्षा मंत्रालय ने PMO के हस्‍तक्षेप का किया था विरोध, मनोहर पर्रिकर को थी जानकारी

राफेल विमान सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने रक्षा मंत्रालय के सुझावों को दरकिनार करते हुए "समानांतर बातचीत" का जरिया अपनाया। खास बात यह कि पीएमओ की इस पहल पर रक्षा मंत्रालय ने कड़ा विरोध भी जाहिर किया था

Author February 8, 2019 1:07 PM
राफेल सौदे पर पीएमओ के “समानातंर बातचीत” से रक्षा मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की थी। (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

बहुचर्चित एवं विवादित राफेल विमान सौदे में नया खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस की कंपनी के साथ हो रहे  डिफेंस डील में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने रक्षा मंत्रालय के सुझावों को दरकिनार करते हुए “समानांतर बातचीत” का जरिया अपनाया। खास बात यह कि पीएमओ की इस पहल पर रक्षा मंत्रालय ने कड़ा विरोध भी जाहिर किया था और तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को इस बात की जानकारी भलिभांति थी। ‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने दावा किया है कि 7.87 बिलयन पाउंड के राफेल सौदे में रक्षा मंत्रालय का पीएमओ द्वारा फ्रांस के साथ “समानांतर बातचीत” पर सख्त आपत्ति थी। पीएमओ के समानांतर बातचीत की वजह से यह सौदा काफी महंगा हो गया। एन राम ने 24 नवंबर, 2015 को लिखे रक्षा मंत्रालय की एक चिट्ठी का हवाला दिया है। जिसमें तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को पीएमओ के हस्तक्षेप के बारे में जानकारी दी गई थी।

रक्षा मंत्रालय द्वारा मनोहर पर्रिकर को लिखी चिट्ठी में कहा गया, “हम पीएमओ को सुझाव दे सकते हैं कि जो भी अधिकारी भारतीय वर्ता समूह का हिस्सा नहीं है वह सौदे के संबंध में फ्रांस के अधिकारियों से बातचीत न करे। यदि किसी कारण से पीएमओ को इस सौदे में रक्षा मंत्रालय द्वारा की जा रही बातचीत में विश्वसनीयता का अभाव दिखता है तब वह नई रूप-रेखा के साथ बातचीत को अपने स्तर पर आगे बढ़ाए।”

गौरतलब है कि इस संबंध में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राफेल सौदे के मोल-भाव में पीएमओ की भूमिका से इनकार किया था। अक्टूबर 2018 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल डील के लिए मोल-भाव में 7 सदस्यीय टीम शामिल थी। जिसका नेतृत्व वायु सेना के डेप्युटी चीफ ने की थी। सौदे से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ‘द हिंदू’ ने दावा किया है कि रक्षा मंत्रालय ने पीएमओ द्वारा की गई पहल का विरोध किया था। क्योंकि, फ्रांस के अधिकारियों के साथ बातचीत में जो स्टैंड रक्षा मंत्रालय ने लिया था, पीएमओ ने उसके उलट पहल की थी। पीएमओ की पहल के खिलाफ रक्षा सचिव की आपत्ति का जिक्र 24 नवंबर, 2015 को लिखे एक नोट में है। इस नोट को डेप्युटी सचिव (Air-II) ने तैयार किया था।

पीएमओ द्वारा समानांतर बातचीत का विवरण रक्षा मंत्रालय के संज्ञान में तब आया जब राफेल सौदे पर बातचीत करने वाली फ्रांस की कमेटी के प्रमुख जनरल स्टीफन रेब ने 23 अक्टूबर, 2015 को एक चिट्ठी लिखी। पत्र में पीएमओ के जॉइंट सेक्रेटरी जावेद अशरफ और फ्रांस के रक्षा मंत्री के कूटनीतिक सलाहकार लुइस वासे के बीच फोन पर बातचीत का उल्लेख है। दोनों के बीच बातचीत 20 अक्टूबर, 2015 को हुई। रक्षा मंत्रालय ने जनरल रेब के पत्र को पीएमओ के संज्ञान में लिया।

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