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नोटबंदी के 50 दिन बाद भी नहीं कम होगी परेशानी, इन 5 वजहों से पीएम नरेंद्र मोदी के दावे को मिलेगी चुनौती

सरकार पूरी ताकत के साथ कैशलेस व्‍यवस्‍था को प्रमोट करने की कोशिश कर रही है, मगर कैशलेस सोसाइटी फिलहाल दूर की कौड़ी लग रहा है।

asian development bank, ADB, india, india growth, india growth estimate, india growth rate, ADB growth rate, india growth rate india, ADB india, india ADBप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। ( File Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को जब 500, 1000 रुपए के पुराने नोट अवैध घोषित किए तो पूरा देश हैरान रह गया था। राष्‍ट्र के नाम संबोधन में मोदी ने कहा था कि 30 दिसंबर तक बैंकों में पुराने नोट जमा और एक्‍सचेंज कराए जा सकेंगे। ऐलान के बाद, बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं। करीब 5 दिन बाद पीएम ने गोवा में एक रैली में बोलते हुए जनता से भावुक अपील की। मोदी ने जनता से 50 दिनों का वक्‍त मांगा था और भरोसा दिया था कि उसके बाद नोटबंदी की वजह से किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। हालांकि इसके कुछ दिन बाद सरकार ने पुराने नाेटों के एक्‍सचेंज को बंद कर दिया। मोदी के मुताबिक, नोटबंदी काले धन और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ ‘यज्ञ’ है जिसमें हर देशवासी भरपूर योगदान कर रहा है। पीएम द्वारा बताए गए 50 दिन के वक्‍त में अब सिर्फ 15 दिन रह गए हैं, मगर हालात सामान्‍य होना तो दूर, बेहतरी की तरफ बढ़ते भी नहीं दिख रहे हैं।

समयसीमा खत्‍म होने के करीब 15 दिन पहले जिस तरह की स्थिति बैंकों और एटीएम के बाहर है, उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि सामान्‍य परिस्थितियां लाने में कम से कम चार-छह महीने का वक्‍त लगेगा। इस बीच सरकार पूरी ताकत के साथ कैशलेस व्‍यवस्‍था को प्रमोट करने की कोशिश कर रही है, मगर कैशलेस सोसाइटी फिलहाल दूर की कौड़ी लग रहा है। नरेंद्र मोदी के 50 दिन वाले दावे को चुनौती देने की 5 प्रमुख वजहे हैं, जो इशारा करती हैं कि नोटबंदी से पैदा हुआ संकट आने वाले महीनों में भी जारी रहेगा।

– सबसे बड़ी समस्‍या जरूरी कैश की सप्‍लाई की है। अगर सरकार नौ लाख करोड़ सर्कुलेशन में डालना चाहती है, तो इस काम में उसे मई, 2017 तक का समय लगेगा। अगर सरकार पूरा 14 लाख करोड़ रुपया सर्कुलेशन में डालना चाहती है, तो उसे अगस्त, 2017 तक का वक्त लगेगा।

– ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि बैंक से प्रति सप्‍ताह 24,000 रुपए निकालने की सीमा बढ़ाई जा सकती है। लेकिन सीमा बढ़ाने के बावजूद बैंकों को पर्याप्‍त कैश उपलब्‍ध कराना बड़ी चुनौती होगी।

– बैंकों व एटीएम के बाहर लगी लंबी कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आरबीआई की प्रिंटिंग प्रेस लगातार नोट छाप रही हैं, मगर वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं।

– आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के छापों में रोज करोड़ों रुपए की नकदी नए नोटों में बरामद हो रही है। बैंकों की मिलीभगत के बिना ऐसा करना संभव नहीं है। सरकारी एजेंसियों को इसकी जड़ का पता लगाने में अच्‍छा-खासा समय लगेगा।

– 2000 रुपए के नोट तो लोगों को मिल रहे हैं, मगर उनका छुट्टा कराने में परेशानी हो रही है। 500 रुपए के नए नोट आकार में अलग होने की वजह से ज्‍यादा मात्रा में छापे नहीं जा पा रहे, इस वजह से दिक्‍कत और बढ़ गई है।

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