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बंगाल हिंसाः नहीं करना चाहती सुनवाई…कह SC जज ने खुद को कर लिया केस से अलग

जस्टिस बनर्जी कोलकाता की रहने वाली है और उन्होंने कहा कि वे मामले की सुनवाई नहीं करना चाहती। इस मामले में पीड़ित परिवार केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच कि मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की जज इंदिरा बनर्जी ने चुनाव के बाद बंगाल में हुई हिंसा की सुनवाई करने वाली बेंच से अपना नाम वापस ले लिया है। जस्टिस बनर्जी कोलकाता की रहने वाली है और उन्होंने कहा कि वे मामले की सुनवाई नहीं करना चाहती। इस मामले में पीड़ित परिवार केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच कि मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार से उस मामले में जवाब मांगा था, जिस पर राज्य सरकार ने कहा था कि याचिकाएं “राजनीति से प्रेरित” हैं और उन्हें खारिज कर दिया जाए। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एमआर शाह की खंडपीठ मृतक भाजपा सदस्य अविजीत सरकार के भाई बिस्वजीत सरकार द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। लेकिन न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने अपना नाम वापस ले लिया है।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने कहा, ‘मुझे इस मामले की सुनवाई में कुछ कठिनाई हो रही है। इस मामले को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। हालांकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को आने वाले मंगलवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था, लेकिन पीठ ने कहा कि किसी भी सूचीकरण की तारीख देना उचित नहीं होगा, क्योंकि पीठासीन न्यायाधीश अलग हो रहे हैं।

जस्टिस बनर्जी के हटने से अब मामले को दूसरी बेंच के पास भेजा जाएगा। सामूहिक बलात्कार की दो पीड़िताओं ने भी अपने मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल या सीबीआई से अपील की है। जीवित बचे लोगों में से एक अनुसूचित जाति समुदाय की नाबालिग है, जिसके साथ 9 मई को मुर्शिदाबाद जिले में कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था।

दूसरी पूर्वी मिदनापुर जिले की 60 वर्षीय महिला है, जिसके साथ 4 मई को उसके 6 साल के पोते के सामने कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था। दोनों ने दावा किया है कि यह राजनीति से प्रेरित हिंसा थी।

वहीं न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की अवकाशकालीन पीठ ने 25 मई को पश्चिम बंगाल सरकार को इस मामले में जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर हत्या के दोनों मामलों में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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