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घट नहीं रहीं रेलयात्रियों की खानपान से जुड़ी शिकायतें, संसदीय समिति नाराज

रेल यात्रियों की खानपान संबंधी शिकायतें कम नहीं होने पर क्षोभ व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि नई खानपान नीति 2017 में तैयारी स्तर से वितरण तक भोजन के गुणवत्ता नियंत्रण के मानदंडों का पालन करके शिकायतों को रोकने के लिए कदम उठाये जाएं और चूक करने वालों के लिये कड़े दंड का प्रावधान हो ।

Author नई दिल्ली | August 7, 2018 7:13 PM
इस फोटो का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (File Photo)

रेल यात्रियों की खानपान संबंधी शिकायतें कम नहीं होने पर क्षोभ व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि नई खानपान नीति 2017 में तैयारी स्तर से वितरण तक भोजन के गुणवत्ता नियंत्रण के मानदंडों का पालन करके शिकायतों को रोकने के लिए कदम उठाये जाएं और चूक करने वालों के लिये कड़े दंड का प्रावधान हो । लोकसभा में पेश रेलवे की नई खानपान नीति 2017 पर रेल संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्रियों की अधिकांश शिकायतें मुख्य रूप से खानपान सेवाओं से संबंधित होती हैं जो विशेष रूप से भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर होती हैं । मंत्रालय ने सूचित किया कि रेलवे ने यात्रियों को तुरंत सहायता के लिये जोनल और मंडल स्तर पर खानपान निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित किये हैं ।

सभी जोनल रेलवे में नियमित, औचक और आवधिक निरीक्षण के माध्यम से खानपान सेवाओं की गुणवत्ता और स्वच्छता की निगरानी के लिये विस्तृत तंत्र भी है। इसके अलावा चलती ट्रेनों में सभी रेल उपयोगकर्ताओं के लिये अखिल भारतीय हेल्पलाइन नंबर 138 के संचालन के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर टोल फ्री नंबर 1800-111-321 पर एक केंद्रीयकृत खानपान सेवाएं निगरानी प्रकोष्ठ काम कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति यात्रियों की शीघ्र सहायता के लिये सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायतों के तुरंत निपटान की मंत्रालय की पहल की सराहना करती है लेकिन समिति इस बात से क्षुब्ध है कि इन सभी तंत्रों के बावजूद यात्रियों की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। समिति चाहती है कि नई खानपान नीति 2017 में तैयारी स्तर से वितरण तक भोजन के गुणवत्ता नियंत्रण के मानदंडों का पालन करके शिकायतों को रोकने के लिये कड़े कदम उठाने चाहिए । साथ ही प्रावधानों का उल्लंघन करने और उसमें चूक करने वालों के लिये कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए ।

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