कथित NEET पेपर लीक को लेकर संसद की तरफ मार्च कर रहे हजारों छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और तेज हो गया। सोमवार की कार्रवाई के बावजूद कई घायल प्रदर्शनकारी वापस लौट आए। वहीं सैकड़ों दूसरे लोग जिज्ञासा, एकजुटता और पेपर लीक विवाद से निपटने के सरकार के तरीके पर गुस्से कर रहे हैं।
मंगलवार से तेज हुआ प्रदर्शन
सोमवार को बड़े प्रदर्शन के दौरान लोगों का यह ग्रुप सड़कों पर नहीं था। हालांकि, वे सरकार से जवाबदेही की मांग करने में प्रदर्शनकारियों से पूरी तरह सहमत थे। वे छोटे-छोटे ग्रुप में प्रोटेस्ट साइट पर घूमे, बांटे जा रहे खाने के पैकेट से खाया, और वहां मौजूद लोगों की संख्या बढ़ाई, भले ही वे खुद प्रदर्शनकारी नहीं थे। जुलाई की उमस भरी दोपहर में उन्होंने अपना ज़्यादातर समय पानी की बोतलों से घूंट भरकर और अपने चेहरे से पसीना पोंछते हुए भी बिताया। अधेड़ उम्र की महिलाओं के कई ग्रुप, जिनमें से कुछ ने कहा कि वे हरियाणा से आई हैं, घूम रहे थे।
फिर दूसरे लोग थे प्रोटेस्ट के हार्ड कोर वे जवान लड़के और लड़कियां जिन्होंने सोमवार को आंसू गैस और पुलिस की लाठियों का सामना किया था। इस ग्रुप के कई लोग कई दिनों से जंतर-मंतर पर बैठे हैं। यह ग्रुप समय-समय पर नारे लगाता रहा- इंकलाब ज़िंदाबाद और भारत माता की जय। साथ ही प्रधानमंत्री पर तीखे हमले भी करता रहा। वे नारे लगाते रहे, “जब जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है।”
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल
कुछ लोग ऐसे भी थे जिनका साफ तौर पर किसी पॉलिटिकल जुड़ाव था। लेफ्ट स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन AISA के मेंबर सोनम वांगचुक के साथ भूख हड़ताल पर बैठे थे। मंगलवार को कांग्रेस सेवा दल की टी-शर्ट पहने लोगों ने खाना और पानी बांटा। CJP वॉलंटियर्स की एक ह्यूमन चेन भीड़ और पुलिस बैरिकेड्स के बीच खड़ी थी। एक वॉलंटियर ने कहा, “हम यहां यह पक्का करने आए हैं कि लोग पुलिस की तरफ न बढ़ें। हम एक कदम बढ़ाएंगे तो वो दम कदम आएंगे। कल पाकिस्तानी तो घोषित ही कर दिया था।” जैसे-जैसे नारे तेज होते गए, पुलिस ने उनसे नारे न लगाने या तय जगह से बाहर प्रोटेस्ट न करने को कहा – नहीं तो, ज़रूरी एक्शन लिया जाएगा। प्रोटेस्ट करने वाले डरे नही बल्कि उनके बड़े ग्रुप्स ने मिलकर तालियां बजाईं, पुलिस का मज़ाक उड़ाया।
पुलिस के एक्शन से रोष
सोमवार को पुलिस के ज़ोर-जबरदस्ती करने से भी लोगों का जोश कम नहीं हुआ बल्कि माहौल जोश से भरा, एनर्जेटिक और बागी लग रहा था। एक प्रदर्शनकारी ने एक पोस्टर पकड़ा हुआ था जिस पर लिखा था, “वे इंसाफ़ के लिए आए थे। उन्हें आंसू गैस और लाठीचार्ज झेलना पड़ा।”
पीएम मोदी के खिलाफ लगे नारे
कई प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर हैरानी जताई कि सरकार ने पेपर लीक की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद कार्रवाई की थी और भविष्य में लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाए थे। एक प्रदर्शनकारी ने पूछा, “अगर कर दिया होता तो हम सब यहाँ क्यों होते?”
मनस्वी नाम की एक कॉलेज स्टूडेंट ने कहा कि पेपर लीक उन लोगों के लिए बहुत निराशाजनक है जो तैयारी के लिए महीनों तक अपने घरों में बंद रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का मतलब यह नहीं है कि वे विपक्ष की किसी एक पार्टी का सपोर्ट करते हैं। उन्होंने कहा, “यह अकाउंटेबिलिटी के बारे में है। पिछली (UPA) सरकार में कई कमियां थीं, लेकिन पहले के PM (मनमोहन सिंह) के बारे में अच्छी बात यह थी कि वह कम से कम प्रेस से बात करने तो आते थे।”
19 साल की खुशी रावत ने कहा कि प्रोटेस्ट मार्च में हजारों लोगों के आने के बाद अपने कामों की अकाउंटेबिलिटी लेने के बजाय, अधिकारियों ने लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा, “मेरे कुछ दोस्त आज मेरे साथ नहीं आ सके क्योंकि वे कल घायल हो गए थे। NEET पेपर लीक के बाद 21 स्टूडेंट्स के सुसाइड करने के बाद सरकार को जवाबदेही लेने की ज़रूरत है।”
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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान घायल हुई एक युवती राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में वेंटिलेटर पर है। आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर्स ने बताया कि युवती का नाम साक्षी है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
