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दिल्ली दंगा: मुस्लिम जानकर 22 साल के युवक को पहले मारा-पीटा, फिर जिंदा है या नहीं जानने के लिए आग में फेंक जिंदा जलाया, कोर्ट में पुलिस का बयान

जब घायल शाहबाज आग में हिलने-डुलने लगा तो दंगाइयों ने उस पर लकड़ी डालकर पेट्रोल छिड़क दिया। इससे वह जिंदा जल गया।

Author Edited By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: August 6, 2020 10:08 AM
delhi police chargesheetदिल्ली दंगों में कम से कम पचास निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग बुरी तरह घायल हुए थे। (Express file photo)

दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान भीड़ ने जब 22 साल के एक युवक की पहचान मुस्लिम के रूप में की तब उसके साथ न केवल मारपीट की बल्कि जब वह बेहोश हो गया तब उन्मादी भीड़ ने उसे आग के हवाले कर दिया। ताकि यह जान सके कि वह जिंदा है या नहीं। या वो बेहोश होने का नाटक तो नहीं कर रहा। जब घायल शाहबाज आग में हिलने-डुलने लगा तो दंगाइयों ने उस पर लकड़ी डालकर पेट्रोल छिड़क दिया। इससे वह जिंदा जल गया।

शाहबाज की मौत से जुड़े घटनाक्रम के बारे में पुलिस ने कोर्ट को तब बताया, जब मामले में आरोपी 24 साल के राहुल शर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी। पुलिस को शाहबाज की सिर्फ खोपड़ी के कुछ हिस्से और हड्डियों के कुछ जले हुए टुकड़े ही मिले हैं। शाहबाज के परिजनों ने उसे शाहबाज का ही होने का दावा किया है। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि डीएनए टेस्ट के बाद ही यह पता चल सकेगा कि वो अंश शाहबाज का है या नहीं? एडिशनल सेशन जज विनोद यादव ने पुलिस के बयान के बाद आरोपी राहुल शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 फरवरी की सुबह सात बजे के करीब शाहबाज अपने घर से जीटीबी अस्पताल निकला था, ताकि वह आंखों का इलाज करा सके और दवाई ले सके।  दोपहर 2.25 बजे के आसपास उसके भाई मतलूब अहमद ने उसे फोन कॉल किया था, तब उसने बताया था कि वो करावल नगर में है और अंदर की गलियों के रास्ते वह घर आने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद मतलूब लगातार शाहबाज को फोन कॉल करता रहा लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आ रहा था। 27 फरवरी को जब मतलूब अपने भाई की तलाश कर रहा था, तभी किसी ने बताया कि उसके भाई शाहबाज को दंगाइयों ने जिंदा जला दिया है।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जब भीड़ ने शाहबाज की पहचान मुस्लिम के रूप में की तब उसे मारा-पीटा गया। पुलिस ने बताया, “उसने (शाहबाज) झोपड़ियों की दीवार पर चढ़कर, झाड़ियों से होते हुए और पानी से होते हुए वजीरावाद पीटीएस की तरफ भागने की कोशिश की लेकिन राहुल शर्मा और अन्य दंगाइयों ने उसका पीछा करते हुए उसे पकड़ लिया और बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद दंगाई भीड़ शाहबाज को मुख्य पुस्ता रोड पर खींच लाई। इस दौरान अमन और मोहित ने शाहबाज़ की कलाई घड़ी लूट ली। थोड़ी ही देर बाद वह बेहोश हो गया। इसी बीच दंगाइयों की भीड़ में से किसी ने कहा कि यह चेक करो कि यह सचमुच बेहोश हो चुका है या नाटक कर रहा है।”

पुलिस ने बताया, “इसी बीच कुछ लोगों ने सूखी झाड़ी लाकर उसके ऊपर पर डाल दिया। दूसरे दंगाइयों ने उस पर पेट्रोल छिड़क दिया और माचिस से उसमें आग लगा दी। शाहबाज जिंदा था, वह अचानक हरकत करने लगा। तभी दंगाइयों ने रोड किनरे पड़ी रेहड़ी (ठेले) को तोड़कर उसकी लकड़ियां उस पर डाल दीं। इसके बाद कुछ और पेट्रोल उस पर छिड़क दिया। देखते ही देखते शाहबाज जिंदा जला दिया गया।”

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