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देश में सबसे ज़्यादा घनी और गरीब आबादी वाले दिल्ली के इस जिले में आधे परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं

सर्वे साल 2018 में पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में हुई तीन बच्चियों की भूख के कारण मौत के बाद किया गया था। जांच में पता चला था कि जिन तीनों लड़कियों की भूख से मौत हुई थी, उनके परिवार के पास राशन कार्ड ही नहीं था।

Author Translated By नितिन गौतम नई दिल्ली | Updated: September 14, 2020 10:38 AM
delhi northeast most population ration cardउत्तर पूर्वी दिल्ली देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले इलाकों में शामिल है। (एक्सप्रेस फोटो)

दिल्ली के 11 जिलों में से उत्तर पूर्वी दिल्ली देश का सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला इलाका है। इसके साथ ही देश के सबसे गरीब इलाकों में भी इसकी गिनती की जाती है। अब एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि यहां के 47.88 फीसदी परिवारों के पास ही राशन कार्ड है। वहीं 90.74 फीसदी लोग यहां आमतौर पर राशन लेते हैं। दिल्ली के इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिक्स निदेशालय द्वारा तैयार किए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है।

यह सर्वे नवंबर 2018 से नवंबर 2019 के बीच किया गया और 20 लाख से ज्यादा परिवारों को इस सर्वे में शामिल किया गया था। दक्षिणी पूर्वी दिल्ली में, जिसमें निजामुद्दीन, सरिता विहार और तुगलकाबाद जैसे इलाके आते हैं, वहां के लोगों के पास दिल्ली में सबसे कम राशन कार्ड हैं। दक्षिण पूर्वी दिल्ली में कुल 33.91 फीसदी लोगों के पास ही राशन कार्ड हैं।

यह सर्वे साल 2018 में पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में हुई तीन बच्चियों की भूख के कारण मौत के बाद किया गया था। जांच में पता चला था कि जिन तीनों लड़कियों की भूख से मौत हुई थी, उनके परिवार के पास राशन कार्ड ही नहीं था।

सर्वे में इस बात का भी पता लगाया गया कि दिल्ली में कितने परिवारों के पास लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल फोन्स और इंटरनेट कनेक्शन है। सर्वे के अनुसार दिल्ली के 20.05 लाख परिवार यानि कि कुल 21 फीसदी जनता लैपटॉप या डेस्कटॉप का इस्तेमाल करती है। इनमें से 80 फीसदी के पास इंटरनेट कनेक्शन भी है।

सर्वे के अनुसार, पूर्वी दिल्ली में सबसे ज्यादा 83.62 फीसदी लोगों के पास कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन है। वहीं जो जिला इस मामले में पिछड़ा हुआ है, उसमें भी उत्तर पूर्वी दिल्ली का नाम आता है। दिल्ली के 93.83 फीसदी परिवारों के पास मोबाइल फोन है और 0.53 फीसदी परिवारों के पास ही अब लैंडलाइन फोन बचा है। वहीं दिल्ली की 3 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसके पास ना मोबाइल फोन है और ना ही लैंडलाइन नंबर। बता दें कि इन सामाजिक आर्थिक सर्वे से सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को नीतियां बनाने में मदद मिलती है।

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