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परियोजनाओं में देरी के लिए पूर्वोत्तर राज्य ही जिम्मेदार: केंद्र

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने उपयोगिता प्रमाणपत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व अन्य जरूरी प्रमाणपत्र समय पर नहीं दिए जिसके कारण इनके पूरा होने में देरी हुई।

Author नई दिल्ली | March 2, 2016 10:57 PM
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह। (पीटीआई फाइल फोटो)

पूर्वोत्तर क्षेत्र में विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करने में देरी के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को जिम्मेदार ठहराते हुए केंद्र ने बुधवार को कहा कि उनकी सुस्ती के कारण कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो रही हैं। लोकसभा में राम प्रसाद शर्मा के पूरक सवाल के जवाब में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास से जुड़े मामले के मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने उपयोगिता प्रमाणपत्र, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व अन्य जरूरी प्रमाणपत्र समय पर नहीं दिए जिसके कारण इनके पूरा होने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्ट है कि कोष समय पर नहीं जारी किया गया और कई मामलों में उपयोगिता प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज भेजने में देरी हुई।

सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के तहत 81 चालू परियोजनाओं के लिए 505.48 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है जिसके संबंध में 414.89 करोड़ रुपए की राशि के उपयोग प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि असम राज्य में एनएलसीपीआर योजना के तहत 26 फरवरी, 2016 तक 2609.53 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है जिसके संबंध में 1814.65 करोड़ रुपए की राशि के उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। मंत्री ने कहा कि एनईसी के तहत चालू 81 परियोजनाओं में से 46 देरी से चल रही हैं।

सरकार ने 73 अधिकारियों के खिलाफ की कार्रवाई: सरकार ने बुधवार को कहा कि जनवरी 2015 से फरवरी 2016 के बीच विभिन्न कारणों से 73 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है जिसमें उन्हें बर्खास्त करना, हटाना, अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जाना या त्यागपत्र दिया हुआ माना जाना शामिल है।

लोकसभा में सुप्रिया सुले और टी राधाकृष्ण के पूरक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय, लोक शिकायत व पेंशन मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार का प्रयास विभिन्न उपायों जैसे पारदर्शिता और अधिकारियों के कार्यकरण में जवाबदेही को बढ़ावा देकर उनके कार्यों की नियमित निगरानी कर साहसिक खेल, योग जैसे क्रियाकलापों को अपनाकर अपने अधिकारियों के समग्र कार्य निष्पादन में सुधार करना है।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति है। जनवरी 2015 से फरवरी 2016 के बीच विभिन्न कारणों से 73 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है जिसमें उन्हें बर्खास्त करना, हटाना, अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जाना या त्यागपत्र दिया हुआ माना जाना शामिल है। सिंह ने कहा कि सरकार ने अधिकारियों के हितों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा है ताकि वे बेहतर माहौल में काम कर सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मूल नियम 56 के एक उपबंध के प्रावधानों और विभिन्न सेवाओं के लिए लागू अन्य सेवा नियमों के अनुसार अधिकारियों के कार्य निष्पादन की समीक्षा कर रही है। यह सतत प्रक्रिया है।

चार सौ आइटीआइ के उन्नयन के लिए विश्व बैंक से गठजोड़: सरकार ने बताया कि उसने देशभर में 400 आइटीआइ के उन्नयन के लिए विश्व बैंक के साथ गठजोड़ किया है। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि देश के 34 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में व्यावसायिक प्रशिक्षण उन्नयन परियोजना के तहत 400 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं के उन्नयन के लिए विश्व बैंक के साथ गठजोड़ किया गया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत दिसंबर 2007 में हुई और यह सितंबर 2016 में बंद होनी है। इसके तहत कोष की हिस्सेदारी का अनुपात 75:25 है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है।

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