ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शनिवार को आयोजित राजकीय रात्रि भोज में केवल शाकाहारी खाना परोसे जाने को लेकर विपक्ष लगातार सरकार हमलावर है। रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसको लेकर सरकार पर तंज कसा। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए कहा कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहार भोजन स्वादिष्ट होता है। राहुल ने अपनी इस बात के साथ छोले भटूरे की फोटो भी पोस्ट की।

बता दें कि शनिवार को भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया था। इस भोज का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। भोज के मेन्यू में सिर्फ शाकाहारी था। इसको लेकर सियासत शुरू हो गई है।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा, “80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं। भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है। मेरी बहन के बनाए छोले भटूरे भी स्वादिष्ट होते हैं।” उन्होंने खाने की मेज पर रखे छोले भटूरे की एक तस्वीर भी पोस्ट की।

ब्रिक्स रात्रिभोज का क्या था मेन्यू?

स्टार्टर

मेहमानों को स्टार्टर में ‘खांडवी मिले’ और ‘खुंब गलौटी’ परोसे गए। ‘खंडवी मिले’ भाप में पकाए गए बेसन के रोल हैं, जिन्हें सरसों, नारियल तेल और करी पत्ते का तड़का दिया जाता है।

मेन कोर्स

पनीर लबाबदार: नरम पनीर, प्याज और टमाटर की गाढ़ी ग्रेवी में।

गुच्छी मार्मिक: हिमालयन मोरेल मशरूम और शतावरी के साथ केसर, किशमिश और ममरा बादाम।

कैरट बीन पोरियाल: गाजर और हरी बीन्स, साउथ इंडियन मसाले, नारियल तेल और ताज़े नारियल के साथ।

थक्कली बेले सारू: टमाटर और करी पत्ते के साथ हल्का तूर दाल का शोरबा।

बाजरा पुलाव: बासमती चावल और बाजरा, मसालों और मौसमी खुशबूदार चीज़ों के साथ पकाया जाता है।

चुकंदर रायता: चुकंदर और ताजी जड़ी-बूटियों के साथ ठंडा दही। अलग-अलग तरह की भारतीय रोटियां।

डेजर्ट

पुरानी दिल्ली की फ्रूट क्रीम विद जलेबी: मौसमी फल और हल्की फेंटी हुई क्रीम के साथ क्रिस्पी मीठा पकौड़ा।

शहतूत फिरनी: धीमी आंच पर पका दूध और चावल का हलवा, जिसके ऊपर शहतूत और सोने की पत्ती डाली जाती है।

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यूनाइटेड नेशन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया कि आज की आर्थिक, डेमोग्रेफिक और जियोपॉलिटिकल स्थितियां 1945 जैसी नहीं हैं, इसलिए संस्थागत ढांचे में यह बात झलकनी चाहिए। यहां पढ़ें पूरी खबर…