नोएडा में 13 अप्रैल को हुआ श्रमिक आंदोलन बाद में अचानक हिंसक हो गया था। अब इसके ठीक एक महीने बाद दो आरोपियों पर कार्रवाई की गई है। आकृति चौधरी (25) दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की स्नातक हैं और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं। दूसरा आरोपी लखनऊ के पूर्व पत्रकार सत्यम वर्मा हैं। इन दोनों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस का कहना है, ”दोनों को मज़दूर बिगुल दस्ता का सक्रिय सदस्य पाया गया है और उन्होंने आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।” पुलिस के अनुसार, उन्होंने जिले के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को उकसाया और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की।

इस बीच, अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ता (क्राइम) धर्मेंद्र जैन ने पुष्टि की है कि हिंसा से जुड़े 31 आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सोची-समझी रणनीति के तहत उपद्रव को दिया अंजाम

कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों का लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना तय माना जा रहा है क्योंकि इस कानून के अंतर्गत प्रशासन को लंबी अवधि तक हिरासत में रखने के विशेष अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। मामले की तह तक जाने के लिए गठित विशेष जांच दल और स्थानीय खुफिया इकाई की साझा रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल की वह हिंसक घटना कोई तात्कालिक आक्रोश का परिणाम नहीं थी बल्कि इसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया गया था। साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि सत्यम और आकृति ने प्रदर्शन से काफी समय पहले ही इसकी रूपरेखा तैयार कर ली थी।

भ्रामक और भड़काऊ मैसेज ब्रॉडकास्ट हुए

डिजिटल फोरेंसिक जांच में यह बात भी पुख्ता हुई है कि फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया माध्यमों का इस्तेमाल कर न केवल भ्रामक और उत्तेजक मैसेज ब्रॉडकास्ट किए गए। बल्कि एक बड़ी भीड़ को हिंसक उद्देश्य के लिए एकजुट भी किया गया। पुलिस द्वारा जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही इस ओर साफ इशारा करती है कि घटनास्थल पर मौजूद यह दोनों आरोपी लगातार प्रदर्शनकारियों को उकसाने और स्थिति को अनियंत्रित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

13 अप्रैल को हुए इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुंचाई थी और सुरक्षा बलों पर पथराव भी किया था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली ऐसी साजिशों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी प्रतिबद्धता के तहत इन दोनों पर रासुका लगाया गया है ताकि भविष्य में कोई भी असामाजिक तत्व दोबारा इस तरह के दुस्साहस के बारे में सोच भी न सके।

नोएडा पुलिस ने कुछ आरोपियों की तीन दिन की पुलिस हिरासत (पुलिस कस्टडी) की भी मांग की है जिस पर अदालत ने सुनवाई के लिए 15 मई की तारीख तय की है।