उत्तर प्रदेश सरकार ने कई क्षेत्रों में न्यूनतम आय बढ़ाने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद मजदूर वर्ग में कुछ राहत जरूर है, लेकिन बढ़ती महंगाई को देखते हुए कई कामगार अभी भी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने नोएडा में विरोध प्रदर्शन के बाद कई श्रमिकों से बात की और यह जानने की कोशिश की कि यूपी सरकार के इस फैसले से उनकी जिंदगी में कितना बदलाव आ सकता है।

वीनस भारती का हाल

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली वीनस भारती कढ़ाई-बुनाई का काम करती हैं। उनकी महीने की तनख्वाह करीब 13,000 रुपये है, जबकि उनका खर्च लगभग 12,000 रुपये बैठता है। वह 500 रुपये बिजली पर खर्च करती हैं। इसके अलावा करीब 5,000 रुपये राशन और 2,000 रुपये दवाइयों व अन्य खर्चों पर खर्च हो जाते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए वह कहती हैं, “मैं दो बेटियों की मां हूं। मेरी सबसे छोटी बच्ची अभी मात्र 6 महीने की है और वह गांव में मेरे माता-पिता के साथ रह रही है। मैं और मेरे पति यहां नोएडा में काम करके गुजारा करते हैं। हम दोनों मिलकर महीने का करीब 20,000 रुपये कमा लेते हैं। अगर सैलरी बढ़ेगी, तो हम अपने बच्चों का बेहतर ध्यान रख पाएंगे। तबीयत खराब होने पर छुट्टी लेने का डर भी नहीं रहेगा।” वह बताती हैं कि उनकी कोशिश रहती है कि ओवरटाइम करके महीने में 18,000 रुपये तक कमा सकें।

दिनेश श्रीवास्ताव का हाल

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के रहने वाले 37 वर्षीय दिनेश श्रीवास्तव भी कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। वह कपड़ों की फैक्ट्री में काम करते हैं और उनकी महीने की आय करीब 16,000 रुपये है। वह लगभग 4,000 रुपये किराया देते हैं, बिजली का बिल करीब 1,000 रुपये आता है और राशन पर 8,000 रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा शिक्षा पर 7,000 रुपये और दवाइयों व अन्य खर्चों पर करीब 500 रुपये खर्च होते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि सभी राज्यों में एक समान सैलरी होनी चाहिए। मेरी पत्नी भी काम करती है, लेकिन दोनों की कमाई मिलाकर भी खर्च पूरे नहीं हो पाते। अगर सरकार न्यूनतम आय में 3,000 रुपये तक बढ़ोतरी कर सकती है, तो इसे और बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि कम से कम हमारी कुल आय 20,000 रुपये तक पहुंच सके।” वह कहते हैं, “15 साल काम करने के बाद भी खास बचत नहीं हो पाई। हाल ही में मैंने अपनी 7 साल की बेटी के लिए 3,500 रुपये की स्टेशनरी खरीदी है और आगे भी खर्च बढ़ते ही जाएंगे।”

प्रेम कुमार का हाल

उत्तर प्रदेश के एटा के रहने वाले 35 वर्षीय प्रेम कुमार पिछले कई सालों से स्टिचिंग का काम कर रहे हैं। उनकी महीने की आय 15,000 से 16,000 रुपये के बीच है। वह 4,000 रुपये किराया देते हैं, करीब 900 रुपये बिजली पर खर्च करते हैं और राशन पर लगभग 8,000 रुपये खर्च होता है। शिक्षा पर करीब 1,000 रुपये और दवाइयों व अन्य जरूरतों पर लगभग 3,000 रुपये खर्च होते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं इस कंपनी में पिछले 10 सालों से काम कर रहा हूं। मेरे परिवार में पांच सदस्य हैं-तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा है। बेहतर नौकरी की तलाश में मैं नोएडा आया था।” उन्होंने कहा, “सरकार ने न्यूनतम आय बढ़ाने का फैसला तो किया है, लेकिन यह महंगाई को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया लगता है। हमें यह भी चिंता है कि कंपनियां इसे सही तरीके से लागू करेंगी या नहीं।”

पिंकी देवी का हाल

बिहार के समस्तीपुर से नोएडा आईं 38 वर्षीय पिंकी देवी भी परेशान हैं। वह एक ऋचा एक्सपोर्ट कंपनी में काम करती हैं और उनकी महीने की आय करीब 13,300 रुपये है। वह 4,000 रुपये किराया देती हैं, 4,000 से 5,000 रुपये राशन पर खर्च होता है और करीब 800 रुपये बिजली पर खर्च होते हैं। शिक्षा पर 10,000 से 12,000 रुपये और दवाइयों व अन्य जरूरतों पर करीब 3,000 रुपये खर्च हो जाते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं अपने घर में अकेली कमाने वाली हूं। तीन साल पहले हार्ट अटैक से मेरे पति की मौत हो चुकी है। पिछले 14 साल से मैं नोएडा में काम कर रही हूं। मेरी दो बेटियां 10वीं और 12वीं में पढ़ रही हैं और एक बेटा यूपीएससी की तैयारी कर रहा है।” वह बताती हैं कि हर महीने उन्हें कर्ज लेना पड़ता है, ताकि घर का खर्च चल सके। उनका कहना है कि “अगर आय 20,000 रुपये तक भी हो जाए, तब भी बचत मुश्किल है।” उन्हें इस बात की भी चिंता है कि न्यूनतम आय बढ़ने के बाद कंपनियां ओवरटाइम देना कम कर सकती हैं।

धर्मेंद्र कुमार का हाल

बिहार के गया से नोएडा आए 38 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। वह एक फैक्ट्री में काम करते हैं और महीने में करीब 11,000 रुपये कमाते हैं। वह लगभग 1,000 रुपये किराया देते हैं, 4,500 रुपये खाने पर खर्च करते हैं, 200 रुपये दवाइयों पर और 200 रुपये बिजली पर खर्च होते हैं। इसके अलावा शिक्षा और अन्य जरूरतों पर करीब 8,000 रुपये खर्च हो जाते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार के साथ नोएडा में एक कमरे में रहता हूं। मेरी दो बेटियां हैं और मैं गांव में भी पैसे भेजता हूं।” वह मानते हैं कि सरकार का न्यूनतम आय बढ़ाने का फैसला अच्छा है। “मेरी एक बेटी सरकारी स्कूल में पढ़ती है, जबकि दूसरी प्राइवेट स्कूल में। अब आय बढ़ने के बाद मैं उनकी पढ़ाई पर और खर्च कर पाऊंगा।”

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