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पहली बार शनिवार और रविवार को भी चलेगी संसद, मानसून सत्र में सांसदों को कोई छुट्टी नहीं, जानें- और क्या बदलाव हो रहे पहली बार?

कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही में कुछ बदलाव किए गए हैं। बदलावों के अनुसार दोनों सदनों की कार्यवाही बगैर किसी छुट्टी के चलेगी।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 2, 2020 4:21 PM
monsoon session, Parliament, Parliament House, coronavirus, Covid 19, Monsoon Session, Monsoon session of Parliament, No weekend break, monsoon session parliament, coronavirus protocols, Rajya Sabha Secretariat, Covid 19 pandemic, Covid 19 guidelinesParliament monsoon session: शनिवार और रविवार को भी चलेगा संसद। (फ़ाइल)

कोरोना संकट के बीच संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही में कुछ बदलाव किए गए हैं। बदलावों के अनुसार सदनों की कार्यवाही बगैर किसी छुट्टी के चलेगी, वहीं मानसून सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा लेकिन शून्य काल रहेगा।

नए नियमों के मुताबिक संसद अब शनिवार और रविवार को भी चलेगा। इसके अलावा आम तौर पर दोनों सदनों में एक साथ बैठकें होती हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस बार असाधारण परिस्थिति के कारण एक सदन सुबह के समय बैठेगा और दूसरे की कार्यवाही शाम को होगी। लोक सभा पहले दिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक बैठेगी। वहीं राज्य सभा पहले दिन यानी 14 सितंबर को दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक बैठेगी लेकिन बाकी दिन सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक ही बैठेगी। इस दौरान हफ्ते के अंत में मिलने वाली छुट्टी भी नहीं होंगी। अब सदन सातों दिन काम करेगा।

संसद के मानसून सत्र से पहले राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सांसदों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक और केंद्रीय गृह, स्वास्थ्य तथा अनुसंधान विभागों के सचिवों संग बैठक की थी। नायडू ने इस दौरान कई मुद्दे उठाए और राज्यसभा सदस्यों की स्वास्थ्य सुरक्षा तथा निर्बाध यात्रा को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।

इस बदलाव पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सवाल खड़े किए हैं। थरूर ने ट्वीट कर कहा, “मैंने चार महीने पहले ही कह दिया था कि लोकतंत्र और विरोध के सुरों को दबाने के लिए महामारी का बहाना बनाया जाएगा। देरी से शुरू हो रहे सत्र के लिए बड़े आराम से कह दिया कि प्रश्नकाल नहीं होगा। हमें सुरक्षित रखने के नाम पर इसे जस्टिफाई कैसे कर सकते हैं?”

थरूर ने अगले ट्वीट में कहा, “सरकार से सवाल करना संसदीय लोकतंत्र के लिए ऑक्सीजन जैसा होता है। यह सरकार संसद को सिर्फ नोटिस बोर्ड तक समेटना और बहुमत को रबर स्टांप की तरह इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि जो चाहे करवा सके।”

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