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CBI के जरिए हमें कुचलने में जुटी हुई है भाजपा: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांगे्रस की प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि राजग सरकार सीबीआइ का राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल कर रही है और यह प्रधानमंत्री कार्यालय के एक विभाग के रूप में काम कर रही है। ममता बनर्जी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि हम […]

12 बजे पीएम से मिलेंगी ममता, कर्ज में छूट की मांग करेंगी (फोटो: फाइल)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांगे्रस की प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि राजग सरकार सीबीआइ का राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल कर रही है और यह प्रधानमंत्री कार्यालय के एक विभाग के रूप में काम कर रही है। ममता बनर्जी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि हम एकमात्र दल हैं जो भाजपा से लड़ाई लड़ रहे हैं, जो तृणमूल कांग्रेस को कुचलने का प्रयास कर रही है। पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री मदन मित्रा की गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध है। भाजपा हमसे ईर्ष्या कर रही है लेकिन लोकतंत्र को कुचला या थोपा नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि भाजपा का जो रवैया देखने को मिल रहा है, वह सरासर तानाशाही है। तृणमूल कांग्रेस देश की जनता को छोड़कर किसी के आगे नहीं झुकेगी। यह एक राजनीतिक लड़ाई है और इसे राजनीतिक रूप से व लोकतांत्रिक ढंग से लड़ा जाएगा। आप हमारी आवाज को बंद नहीं कर सकते। ममता ने कहा कि सारदा चिटफंड घोटाले में उनकी पार्टी की कोई भूमिका नहीं थी क्योंकि यह उनकी सरकार के दौरान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सीबीआइ के पास कई मामले लंबित हैं जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला है। यह स्वायत्त इकाई नहीं है बल्कि पीएमओ का एक विभाग है। अगर सीबीआइ महत्त्वपूर्ण है तो उसे जनता के हित में काम करना चाहिए। रवींद्र नाथ टैगोर का पदक चोरी हो गया, उसका भी पता नहीं लगाया गया। क्या सीबीआइ ने मामला बंद कर दिया।

ममता ने कहा कि 2010 के ज्ञानेश्वरी दुर्घटना मामले में करीब 300 लोग मारे गए थे। तत्कालीन रेल मंत्री के रूप में मैंने सीबीआइ जांच शुरू की थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। सिंगुर मामले में, रिजवानुर रहमान मामले में, नंदीग्राम मामले में कुछ नहीं हुआ। इसलिए क्या सीबीआइ सरकार का औजार है। अगर आप मुझसे सीबीआइ की भूमिका के बारे में पूछेंगे तो मैं कहूंगी, ए राजनीतिक प्रतिशोध, बी राजनीतिक प्रतिशोध और सी राजनीतिक प्रतिशोध।
सारदा घोटाले में हाल में गिरफ्तार किए गए मदन मित्र का बचाव करने का प्रयास करते हुए ममता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एकमात्र पार्टी है जिसकी किसी घोटाले में कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह घोटाला उनकी सरकार के शासनकाल के दौरान नहीं हुआ है। 2001 से 2006 तक यह वाममोर्चा सरकार के दौरान हुआ। और सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि केरल, त्रिपुरा, असम और ओड़िशा में भी हुआ। चिटफंड गैरकानूनी नहीं है लेकिन इसके नाम पर लोगों को धोखा देना गैरकानूनी है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि सारदा घोटाले के बाद उनकी सरकार ने एक न्यायिक आयोग गठित किया और अपनी जमा पूंजी गंवा बैठने वाले लोगों के बीच ढाई सौ करोड़ रुपए बांटे। चिटफंड केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है और कंपनी मामलों, सेबी और रिजर्व बैंक के दायरे में आता है। इन मामलों को देखने के लिए राज्य के पास कोई कानून नहीं है। उन्होंने कहा हमने यह मुद्दा उठाया है और पश्चिम बंगाल विधानसभा ने एक कानून भी पारित किया है और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा है। दो महीने गुजर गए, उन्होंने कहा कि कुछ और संशोधनों की जरूरत है। हमने फिर से इसे पास कर के राज्यपाल को भेजा है।

 

 

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