महाराष्ट्र के मीरा रोड स्थित एक स्कूल का एक सर्कुलर इन दिनों चर्चा में है। स्कूल ने छात्रों के टिफिन को लेकर ऐसा निर्देश जारी किया, जिसके बाद राजनीतिक दलों ने सवाल खड़े कर दिए। मामला बढ़ा तो स्कूल को अपने फैसले पर पीछे हटना पड़ा।
मीरा रोड ईस्ट के सेवन स्क्वायर अकादमी ने 8 सितंबर को अभिभावकों के लिए एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि पर्युषण पर्व के दौरान छात्र अपने टिफिन में कंद-मूल वाली सब्जियां न लाएं। स्कूल ने यह अवधि 8 से 16 सितंबर तक बताई थी।
टिफिन में प्याज, लहसुन और आलू पर रोक
स्कूल के सर्कुलर में छात्रों से प्याज, लहसुन, आलू और दूसरी कंद-मूल सब्जियां टिफिन में न लाने को कहा गया था। इसके अलावा स्कूल की कैंटीन में भी पर्युषण के दौरान प्याज, लहसुन और आलू के बिना खाना परोसने की बात कही गई थी। स्कूल ने इसके पीछे पर्युषण पर्व से जुड़ी पारंपरिक प्रथाओं का हवाला दिया था। हालांकि, सर्कुलर सामने आने के बाद इस फैसले का राजनीतिक विरोध शुरू हो गया।
शिवसेना ने भी किया विरोध
खास बात यह रही कि स्कूल के इस निर्देश को बीजेपी की सहयोगी शिवसेना का भी समर्थन नहीं मिला। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने स्कूल के निर्देश की आलोचना करते हुए इसे ‘फतवा’ बताया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीति को स्कूलों में नहीं आना चाहिए। धर्म, जाति और समुदाय जैसी चीजों को शिक्षण संस्थानों से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इस तरह का फरमान जारी होना दुर्भाग्यपूर्ण है और बीजेपी नेताओं को भी ऐसे मामलों पर ध्यान देना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी इस मामले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आखिर कोई यह कैसे तय कर सकता है कि लोग क्या खाएं और क्या न खाएं। उन्होंने इस मुद्दे को ‘लव जिहाद’ से भी ज्यादा गंभीर बताया।
मनसे ने स्कूल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने भी स्कूल के सर्कुलर का विरोध किया। एमएनएस की मीरा-भायंदर छात्र शाखा के अध्यक्ष रॉबर्ट डिसूजा ने इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों से आने वाले छात्रों पर किसी एक धर्म की प्रथा थोपना सही नहीं है। उन्होंने शिक्षा विभाग और उप शिक्षा निदेशक के पास शिकायत दर्ज कर स्कूल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की।
विरोध के बाद स्कूल ने वापस लिया सर्कुलर
विवाद बढ़ने के बाद सेवन स्क्वायर अकादमी ने अपना सर्कुलर वापस ले लिया। स्कूल के एक अधिकारी ने कहा कि सर्कुलर को हटा दिया गया है और इस मामले में कोई समस्या नहीं है। अधिकारी के मुताबिक, इस मुद्दे को मीडिया में जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
बीजेपी विधायक की पत्नी करती हैं स्कूल का संचालन
यह मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से चर्चा में आया क्योंकि स्कूल का प्रबंधन बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की पत्नी करती हैं। नरेंद्र मेहता ने स्कूल के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि स्कूल हर साल पर्युषण के दौरान कैंटीन में जैन खाना तैयार करता है। इसके बाद गणेशोत्सव और फिर नवरात्रि के दौरान भी स्कूल में सात्विक भोजन का पालन किया जाता है।
मेहता ने कहा कि स्कूल का उद्देश्य छात्रों पर कोई पाबंदी लगाना नहीं था। उन्होंने दावा किया कि स्कूल बच्चों के लिए एक पवित्र वातावरण बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें पौष्टिक भोजन देने और कुछ खाद्य पदार्थों से बचने का अनुरोध कर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों पर किसी तरह की अनिवार्यता नहीं थी।
शिक्षा विभाग करेगा मामले की जांच
मीरा-भायंदर की शिक्षा अधिकारी सुलभा वटारे ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी मिली है। हालांकि, उन्होंने अभी स्कूल प्रबंधन से मुलाकात नहीं की है और न ही परिसर का निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन से मिलने और मामले पर चर्चा करने के बाद ही वह इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्देश या टिप्पणी कर पाएंगी।
