हैदराबाद में पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 ऐसे कथित फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया, जो बिना वैध मेडिकल योग्यता और लाइसेंस के मरीजों का इलाज कर रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई ने शहर में अवैध रूप से चल रहे मेडिकल प्रैक्टिस के गंभीर खतरे को उजागर किया है।
हैदराबाद पुलिस कमिश्नर की टास्क फोर्स ने शहर के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर इन आरोपियों को पकड़ा। इनमें छह आरोपी सिकंदराबाद जोन और पांच जुबली हिल्स इलाके से गिरफ्तार किए गए। पुलिस के मुताबिक, कुछ आरोपी फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्र लगाकर मरीजों का इलाज कर रहे थे।
फर्जी MBBS सर्टिफिकेट से लेकर दवाइयों का जखीरा बरामद
टास्क फोर्स के डीसीपी वैभव रघुनाथ गायकवाड़ ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र, डॉक्टरों के नाम वाली रबर स्टैंप, मरीजों की पर्चियां, हजारों दवाइयां, ग्लूकोज की बोतलें और अन्य मेडिकल उपकरण बरामद किए गए हैं। कुछ आरोपियों के पास फर्जी इंडियन मेडिकल काउंसिल MBBS प्रमाणपत्र भी मिले।
पुलिस ने कई एक्सपायर्ड दवाइयां भी जब्त की हैं। बरामद सामान में बैचलर ऑफ होम्योपैथी एंड सर्जरी के फर्जी प्रमाणपत्र, 277 इंजेक्शन, करीब 1,000 टैबलेट, ग्लूकोज पैकेट और घर पर बनाए गए पेट्रोलियम जेल पैक भी शामिल हैं।
कोई डर्मेटोलॉजिस्ट बना, तो कोई यूनिवर्सिटी में कर रहा था इलाज
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में कम से कम दो खुद को त्वचा रोग विशेषज्ञ यानी डर्मेटोलॉजिस्ट बताकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। इनमें से एक आरोपी उस्मानिया यूनिवर्सिटी के अंदर स्थित एक क्लीनिक में प्रैक्टिस करता मिला।
कुछ आरोपी पहले लैब टेक्नीशियन या स्वास्थ्यकर्मी के तौर पर काम कर चुके थे, जबकि एक आरोपी के पास सिर्फ आर्ट्स की डिग्री थी। इसके बावजूद वे मरीजों को दवाइयां, इंजेक्शन और IV सलाइन तक दे रहे थे।
रोजाना 50 से 100 मरीजों का इलाज
जांच में सामने आया कि कुछ कथित फर्जी डॉक्टर रोजाना 50 से 100 मरीजों का इलाज कर रहे थे। वे प्रत्येक मरीज से करीब 100 रुपये तक फीस लेते थे। पुलिस ने एक मेडिकल शॉप संचालक को भी हिरासत में लिया है, जिस पर बिना डॉक्टरों की योग्यता और प्रमाणपत्र जांचे बड़ी मात्रा में दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आरोप है।
दो मौतों के बाद तेज हुई कार्रवाई
डीसीपी गायकवाड़ के अनुसार, इस विशेष अभियान की शुरुआत दो हालिया मौतों के बाद की गई। पुलिस को आरोप है कि अयोग्य ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनरों ने मरीजों को गलत या जरूरत से ज्यादा दवाइयां दी थीं।
पहले मामले में हैदराबाद के कारवां इलाके में एक कथित RMP द्वारा 30 वर्षीय महिला को गलत दवा दिए जाने के बाद उसकी मौत हो गई। दूसरे मामले में खम्मम शहर में 16 वर्षीय लड़की को एंटीबायोटिक की कथित रूप से अधिक मात्रा दिए जाने के बाद उसकी मौत हुई।
कई इलाकों में छापेमारी, 11 मामले दर्ज
टास्क फोर्स ने सिकंदराबाद के रामगोपालपेट, चिलकलगुडा और डोमलगुडा के अलावा जुबली हिल्स इलाके के फिल्मनगर और मधुरानगर में कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, आरोपी बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के अनजान मरीजों का इलाज कर रहे थे और उन्हें IV सलाइन, ग्लूकोज, इंजेक्शन और विभिन्न दवाइयां दे रहे थे।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में कुल 11 मामले दर्ज किए हैं। मामले की आगे जांच जारी है।
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