बेंगलुरु में नाबालिगों के बीच शराब पीने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई पब और क्लबों में नियमों की अनदेखी कर कम उम्र के युवाओं को भी एंट्री दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं। इसी बीच कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने पुलिस को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि चाहे पब हो, बार हो, ब्रुअरी हो या शराब परोसने वाला कोई अन्य प्रतिष्ठान, कानूनी उम्र से कम किसी भी व्यक्ति को एंट्री नहीं दी जाएगी, उन्हें किसी भी कीमत पर शराब नहीं परोसी जाएगी।
जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में बेंगलुरु में एक अहम बैठक हुई थी। इसी बैठक में प्रियंक खड़गे ने कहा था कि शहर में किशोरों और युवाओं के बीच शराब पीने का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अब किसी भी पब, बार, क्लब या शराब परोसने वाले प्रतिष्ठान में बिना उम्र साबित करने वाले वैध पहचान पत्र के एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके अलावा नाबालिगों को शराब भी नबीं परोसी जाएगी। यह भी साफ किया गया है कि केवल सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र के आधार पर ही उम्र की पुष्टि की जाएगी।
प्रियंक खड़गे के सख्त तेवर
प्रियंक खड़गे ने कहा कि बच्चों और युवाओं को नशे की लत से बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान मुनाफे के लिए युवाओं की सुरक्षा और भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। नियम बिल्कुल स्पष्ट है-नो आईडी, नो एंट्री। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी नाबालिग को शराब परोसी जाती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रियंक खड़गे ने अपने फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की है। उन्होंने बताया कि शहर की पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि पब, बार और क्लबों के मालिकों और प्रबंधकों के खिलाफ नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए। यह भी साफ कहा गया है कि सभी पब और क्लबों को अपने सीसीटीवी फुटेज एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रखी जाए। इसके जारिए चेक किया जाएगा कि वहां नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
सर्वे में क्या पता चला है?
कर्नाटक के गृह मंत्री ने एक हालिया अध्ययन का भी जिक्र किया। इस अध्ययन में चार शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले 4,093 छात्रों को शामिल किया गया था। इसमें प्री-यूनिवर्सिटी से लेकर हायर सेकेंडरी और कॉलेज स्तर तक के छात्रों का सर्वे किया गया। अध्ययन में पाया गया कि बेंगलुरु का हर तीसरा युवा शराब या तंबाकू के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का सामना कर रहा है।
प्रियंक खड़गे ने अध्ययन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सर्वे में शामिल 33 प्रतिशत युवाओं ने शराब के सेवन की बात स्वीकार की, जबकि करीब 18 प्रतिशत तंबाकू के आदी पाए गए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, देश में तंबाकू सेवन की दर 8.7 प्रतिशत और शराब सेवन की दर 7.9 प्रतिशत है। वहीं कर्नाटक में तंबाकू सेवन की दर 4.7 प्रतिशत और शराब सेवन की दर 8.5 प्रतिशत है। उनका कहना है कि बेंगलुरु के आंकड़े इन दोनों स्तरों से अधिक चिंताजनक हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में कर्नाटक में केवल 21 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को ही शराब परोसी जा सकती है। जनवरी 2023 में तत्कालीन भाजपा सरकार इस नियम में बदलाव करना चाहती थी और शराब पीने की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने की बात कही थी। हालांकि, भारी विरोध के बाद सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।
पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?
दरअसल, कर्नाटक सरकार को यह सख्त कदम इसलिए भी उठाना पड़ा क्योंकि इसी साल फरवरी में बेंगलुरु के राजराजेश्वरिनगर इलाके स्थित लेगेसी ब्रूइंग कंपनी में आयोजित एक शराब पार्टी के बाद 15 वर्षीय एक किशोर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के मुताबिक, शराब पीने के बाद उसे अपने माता-पिता का सामना करने का डर था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया।
इस मामले में पुलिस ने पब प्रबंधन और कर्मचारियों के खिलाफ नाबालिगों को शराब उपलब्ध कराने के आरोप में मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नाबालिगों को शराब परोसने और उनकी एंट्री रोकने से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। अब उसी दिशा में राज्य सरकार ने नए निर्देश जारी किए हैं।
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