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आलोक वर्मा पर सीवीसी इंक्‍वायरी को मॉनिटर करने वाले पूर्व जज ने कहा- भ्रष्‍टाचार के सबूत नहीं, जल्‍दबाजी में लिया गया फैसला

इस सप्ताह की घटनाओं के बारे में बात करते हुए जस्टिस पटनायक ने कहा, 'भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई पॉवर कमेटी को फैसला करना चाहिेए। मगर फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया गया। हम यहां एक संस्था के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें अपना दिमाग लगाना चाहिए था। खासतौर पर सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर। क्योंकि CVC जो कहता है वह अंतिम शब्द नहीं हो सकता है।'

Author January 12, 2019 12:25 PM
जस्टिस पटनायक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘भ्रष्टाचार को लेकर आलोक वर्मा के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। पूरी जांच (CBI के विशेष निदेशक राकेश) अस्थाना की शिकायत पर की गई थी। मैंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी निष्कर्ष मेरा नहीं है।’ (Express Photo)

रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक ने शुक्रवार (11 जनवरी, 2019) को कहा कि ‘आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था। सीवीसी ने जो कहा वो अंतिम शब्द नहीं हो सकता।’ पटनायक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं और उन्हें एपेक्स कोर्ट ने सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (सीवीसी) की निगरानी रखने के लिए कहा था, जिसमें सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद हटा दिया गया। बता दें कि भ्रष्टाचार के आरोपों और गुरुवार को ड्यूटी खत्म करने के आरोप में सीबीआई निदेशक के पद से वर्मा को हटाने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली चयन समिति के बहुत-बहुत जल्दबाजी में लिए निर्णय के वो कड़े आलोचक थे। आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल करने के दो दिन पर सीवीसी ने उनके पद से हटा दिया। सीवीसी के तीन सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जस्टिस एके सीकरी, आलोक वर्मा के पद पर निरंतर बने रहने के खिलाफ थे। वहीं लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अन्य दो सदस्यों के फैसले के पक्ष में नहीं गए और सीवीसी रिपोर्ट पर अपनी असहमति दर्ज कराई।

जस्टिस पटनायक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘भ्रष्टाचार को लेकर आलोक वर्मा के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। पूरी जांच (CBI के विशेष निदेशक राकेश) अस्थाना की शिकायत पर की गई थी। मैंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी निष्कर्ष मेरा नहीं है।’ इंडियन एक्सप्रेस को यह भी पता चला है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को दो पेज की रिपोर्ट में जस्टिस पटनायक ने कहा कि सीवीसी ने मुझे 9 नवंबर, 2018 को राकेश अस्थाना द्वारा कथित रूप से हस्ताक्षरित एक बयान भेजा। मैं स्पष्ट कर सकता हूं कि राकेश अस्थाना द्वारा साइन किया गया यह बयान मेरी उपस्थिति में नहीं बनाया गया था।’

इस सप्ताह की घटनाओं के बारे में बात करते हुए जस्टिस पटनायक ने कहा, ‘भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई पॉवर कमेटी को फैसला करना चाहिेए। मगर फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया गया। हम यहां एक संस्था के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें अपना दिमाग लगाना चाहिए था। खासतौर पर सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर। क्योंकि CVC जो कहता है वह अंतिम शब्द नहीं हो सकता है।’ गौरतलब है कि चयन समिति ने सीवीसी रिपोर्ट और “वर्मा के खिलाफ सीवीसी टिप्पणियों की अत्यंत गंभीर प्रकृति का मानते हुए उन्हें निदेशक पद से हटाने का हवाला दिया।

बता दें कि केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट (सीवीसी) के निष्कर्षों के अनुसार, सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के खिलाफ जांच में हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार के 10 आरोपों में से चार को पुष्ट किया गया था। इसपर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को अपने असंतोष दर्ज कराया। CVC ने 10 सितंबर, 2018 को CBI के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की शिकायत के आधार पर 10 आरोपों की जांच शुरू की। अस्थाना ने पिछले साल कैबिनेट सचिव के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे CVC को जांच के लिए भेजा गया था।

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