ताज़ा खबर
 

रेल मंत्री ने बताया- पिछले 22 महीने में ट्रेन ऐक्सिडेंट में नहीं हुई एक भी मौत, लेकिन…

रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया- कोविड-19 महामारी के कारण अब तक 592 रेल कर्मचारियों की मौत हुई और इस दौरान ना तो किसी कर्मचारी को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजा गया और ना ही ऐसा कोई कर्मचारी है जिसे 2020 में वेतन नहीं मिला हो।

रेल मंत्री पीयूष गोयल। (पीटीआई)

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में बताया कि पिछले करीब दो सालों में ट्रेन एक्सिडेंट में एक भी शख्स की मौत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आखिरी बार रेल दुर्घटना में 22 मार्च, 2019 को मानवीय हानि हुई। यानि पिछले 22 महीनों में भारत में रेल दुर्घटनाओं में एक भी यात्री की मौत नहीं हुई। रेल मंत्री ने बताया कि नए पुनर्गठन रेलवे बोर्ड में पहली बार नामित डायरेक्टर जनरल सुरक्षा नियुक्त किया गया है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में रेल दुर्घटनाओं में करीब 30 हजार लोग मारे गए। ये लोग रेल पटरियों पर अतिक्रमण और अप्रिय घटनाओं के कारण के अपनी जान गवां बैठे।

इसके अलावा रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया- कोविड-19 महामारी के कारण अब तक 592 रेल कर्मचारियों की मौत हुई और इस दौरान ना तो किसी कर्मचारी को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजा गया और ना ही ऐसा कोई कर्मचारी है जिसे 2020 में वेतन नहीं मिला हो। बता दें कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विनय विश्वम ने सरकार से जानना चाहा था कि मार्च 2020 से कुल कितने कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजा गया और वर्तमान में कितने रेल कर्मचारी है जिन्हें इस दौरान एक महीने से अधिक समय से वेतन प्राप्त नहीं हुआ है।

इसके जवाब में गोयल ने कहा, ‘कोविड-19 के कारण ऐसा कोई भी रेलवे कर्मचारी नहीं है, जिसे छुट्टी पर भेजा गया अथवा जिसे मार्च 2020 से वेतन नहीं मिला।’ एक अन्य सवाल के जवाब में रेल मंत्री ने बताया कि इस महामारी के दौरान 32,641 रेलवे कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के कारण 592 रेलवे कर्मचारी की मृत्यु हुई है।’गोयल ने बताया कि कोरोना संक्रमित रेल कर्मचारियों के उपचार के लिए 48 कोविड देखभाल केंद्र उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘वित्त मंत्रालय ने विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के माध्यम से रेल मंत्रालय को कोविड संबंधी व्यय के लिए सहायता मुहैया कराई है।’

उल्लेखनीय है कि पीयूष गोयल राज्यसभा में विभिन्न पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल के 34,665 पुलों की आयु 100 साल से भी ज्यादा हो चुकी है। हालांकि सरकार उनकी वास्तविक स्थिति का समय समय पर आकलन करती रहती है और साल में दो बार उनका निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेलवे पुलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली है और इसके तहत सभी पुलों का साल में दो बार निरीक्षण किया जाता है।

गोयल ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि एक अप्रैल 2020 की स्थिति के अनुसार 7.5 लाख करोड़ रुपए की लागत पर कुल 513 रेल परियोजनाएं योजना, स्वीकृति और निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। ये परियोजनाएं 53,039 किलोमीटर लंबाई की हैं और उनमें से 10,013 किलोमीटर लंबाई के मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है और मार्च 2020 तक 1.86 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। (एजेंसी इनपुट)

Next Stories
1 जोशीमठ हादसाः ग्लेशियर टूटने के बाद पानी के गुबार ने ले लिया था ‘विकराल’ झील का स्वरूप
2 Kerala Nirmal Lottery NR-211 Results: जारी हुए नतीजे, पहला इनाम 70 लाख रुपये का
3 अलवर के मंच पर राकेश टिकैत ने दिया नारा, ‘हम ही किसान, हम ही जवान’, बोले- रोटी तिजोरी में बंद नहीं होगी
ये पढ़ा क्या?
X