Speaker Om Birla: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव पर सदन में सुनवाई होने तक ओम बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता न करने का फैसला किया है।
कांग्रेस ने मंगलवार को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। कांग्रेस का कहना है कि बजट सत्र के दौरान ओम बिरला का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा। पार्टी का आरोप है कि उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया और कई विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के आदेश दिए।
विपक्षी दलों के करीब 118 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ओम बिरला ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि उन पर कांग्रेस की महिला सांसदों के बारे में कथित रूप से निराधार टिप्पणी करने का आरोप है। इसके अलावा, आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन का मुद्दा भी इसमें शामिल है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि अध्यक्ष का व्यवहार साफ तौर पर पक्षपातपूर्ण रहा। उनका आरोप है कि विपक्ष के नेताओं को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया गया। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में अध्यक्ष से जुड़ी चार घटनाओं का जिक्र किया गया है। इनमें यह आरोप भी शामिल है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान बोलने नहीं दिया गया। उस समय राहुल गांधी ने चीन के साथ 2020 के तनाव का जिक्र करते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला दिया था।
सूत्रों ने यह भी बताया कि विपक्ष ने आठ सांसदों के निलंबन, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर किए गए आपत्तिजनक और व्यक्तिगत हमलों, और अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ कांग्रेस सांसदों के प्रधानमंत्री की सीट के पास आने की सूचना मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का अनुरोध किया था, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
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कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि विपक्ष ने “असाधारण परिस्थितियों” में ऐसा कदम उठाया है। टैगोर ने लिखा, “विपक्ष ने संवैधानिक औचित्य पर भरोसा जताया है। माननीय अध्यक्ष के प्रति व्यक्तिगत आदर रखते हुए, हम विपक्षी सांसदों को सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उठाने के अवसरों से लगातार वंचित किए जाने से व्यथित और दुखी हैं। कई वर्षों बाद, अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, जोो असाधारण परिस्थितियों से उपजा एक असाधारण कदम।”
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी ने कांग्रेस से अनुरोध किया है कि ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष को एक अपील सौंपी जाए। टीएमसी ने यह भी कहा कि अगर स्पीकर दो से तीन दिनों के भीतर विपक्ष की इस अपील पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो पार्टी अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर देगी।
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