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मोदी सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव, जानिए क्‍या हुआ था जब 2003 में कांग्रेस लाई थी वाजपेयी सरकार के खिलाफ ऐसा प्रस्‍ताव

साल 2003 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार देश की पहली ऐसी गैर-कांग्रेसी सरकार बनने जा रही थी, जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया हो। इसी बीच अगस्त 2003 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।

Author Updated: July 18, 2018 2:31 PM
अगस्त 2003 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। (file photo)

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बुधवार (18 जुलाई, 2018) को सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। महाजन ने कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग करने वाले कम से कम छह सांसदों से नोटिस प्राप्त हुए हैं और वह इसे सदन में विचार हेतु रखने के लिए कर्तव्य बाध्य हैं। उन्होंने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के केसिनेनी श्रीनिवास पहले सांसद थे, जिन्होंने अविश्वास नोटिस दिया और सदस्यों से पूछा कि इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। महाजन ने श्रीनिवास प्रस्ताव पेश करने को कहा। प्रस्ताव को कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों समेत 50 से ज्यादा सदस्यों का समर्थन है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ सरकार मजबूत दिखाई दे रही है, क्योंकि पार्टी अपने दम पर ही जरुरी बहुमत जुटा लेने की स्थिति में है। बता दें कि इससे पहले साल 2003 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ भी कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आयी थी।

क्या था मामलाः साल 2003 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार देश की पहली ऐसी गैर-कांग्रेसी सरकार बनने जा रही थी, जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया हो। इसी बीच अगस्त 2003 को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इस अविश्वास प्रस्ताव का आधार बना भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जॉर्ज फर्नांडिस की केन्द्रीय मंत्रीमंडल में वापसी। बहरहाल अटल बिहारी वाजपेयी सरकार अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहुमत साबित करने में सफल रही और उसके पक्ष में 312 वोट पड़े। जबकि विपक्ष में 186 वोट। एआईएडीएमके चीफ जे.जयललिता और नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला ने जहां वोटिंग से परहेज किया, वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने सरकार के पक्ष में वोट किया। उल्लेखनीय है कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और उनमें से तीन में भाजपा ने जीत हासिल की।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रियाः नियमों के अनुसार, सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 50 सांसदों की मंजूरी जरुरी होती है। जब 50 सांसद सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का समर्थन करते हैं, तभी लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरु होगी। टीडीपी के जहां 16 सांसद हैं, वहीं वाईएसआर कांग्रेस के 9। अब चूंकि कई विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन दे दिया है तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जरुरी आंकड़ा मौजूद है। वहीं 545 सदस्यीय लोकसभा में फिलहाल 536 सांसद है, जिनमें से सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 272 सांसदों की जरुरत होगी। अब चूंकि भाजपा के ही संसद में 273 सदस्य हैं, ऐसे में भाजपा अपने अकेले के दम पर ही बहुमत साबित कर लेगी।

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