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भारतीय सेना ने किया साफ, बंकरों को नष्ट करने बुलडोजरों का नहीं हुआ इस्तेमाल, ना ही चीनी सैनिकों के साथ हुई धक्कामुक्की

प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ‘विभिन्न तंत्र भारत-चीन संबंध और साथ ही दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को काफी अच्छे तरीके से संभाल रहे हैं।’

नई दिल्ली/बेजिंग | July 4, 2017 3:03 AM
भारतीय सेना के प्रवक्ता प्रेस वार्ता करते हुए। (तस्वीर- एनएनआई)

भारत-चीन सीमा पर चल रही तनातनी के बीच भारतीय सेना ने आज साफ किया कि भारत के बंकरों को नष्ट करने के लिए चीन ने बुलडोजरों का इस्तेमाल नहीं किया। सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच में आपसी संघर्ष और तनाव को लेकर सेना ने स्थिति साफ करने की कोशिश करते हुए कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के जवानों में धक्कामुक्की भी नहीं हुई। सेना ने साथ ही इस बात से इनकार किया कि सीमा पर चीन के साथ जारी गतिरोध 1962 के बाद से सबसे लंबा है। पिछले कुछ समय से मीडिया में यह खबरें आ रही थीं कि सिक्किम के पास दोनों सेनाओं में गतिरोध बना हुआ है।  चीन और भारत के बीच जारी जुबानी जंग सोमवार को उस समय और बढ़ गई जब चीन ने सिक्किम के करीबीक्षेत्र में चीनी सेना को सड़क निर्माण करने से रोकने की भारतीय सेना की कार्रवाई को पूर्ववर्ती सरकारों के रुख का ‘उल्लंघन’ करार देते हुए कहा कि भारत को अपनी सेना को पीछे हटा लेना चाहिए। इससे पहले भारत ने चीनी दावे को ठुकराते हुए कहा था कि चीन धमकी देना बंद करे क्योंकि 1962 और अब के हालात में काफी फर्क है।भारतीय सेना के एक प्रवक्ता की ओर से यहां जारी किए गए एक बयान में कहा गया, ‘यह घटना दोनों देके बीच सबसे लंबा गतिरोध नहीं है।’

उसने साथ ही कहा कि भारतीय बंकरों को नष्ट करने के लिए किसी बुलडोजर का ‘कभी भी इस्तेमाल’ नहीं किया गया और न ही भारतीय सेना तथा चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों के बीच कोई धक्का मुक्की हुई। इससे पहले सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा था कि भारतीय बंकरों को नष्ट करने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया था। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि छह जून को इस तरह की कोई घटना नहीं हुई और विदेश मंत्रालय के उस बयान की तरफ संकेत किया जिसमें घटना की तारीख 16 जून बताई गई थी। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ‘विभिन्न तंत्र भारत-चीन संबंध और साथ ही दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को काफी अच्छे तरीके से संभाल रहे हैं।’ प्रवक्ता ने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय या भारतीय सेना ने इस कारण से न तो कोई आधिकारिक बयान जारी किया और न ही कोई अनौपचारिक जानकारी दी कि दोनों देश मीडिया की चर्चाओं से दूर इस तरह के संवेदनशील मुद्दों से सबसे अच्छे तरीके से निपट सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस स्थिति में ‘चूंकि कुछ घटनाएं भूटान से जुड़ी हैं, इसलिए विदेश मंत्रालय पहले ही मुद्दे पर महत्वपूर्ण जानकारी दे चुका है।’  इससे पूर्व चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा सिक्किम सेक्टर में भारत-चीन की सीमा साफ तौर पर सीमांकित है। शुआंग ने कहा, चीनी सरजमीन में प्रवेश कर और चीनी सैनिकों की सामान्य गतिविधियों को बाधित कर, भारत ने सीमा करार और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी उसूल का उल्लंघन किया है और सीमा क्षेत्र की शांति और स्थिरता बाधित की है। चीनी प्रवक्ता ने कहा, हम भारतीय पक्ष से चाहते हैं कि वे अपने सैनिकों को सीमा के भारतीय हिस्से में लौटाए और संबंधित क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बहाली की स्थितियां पैदा करे। चीन और भारत ‘दोका ला’ क्षेत्र में तकरीबन एक महीने से तनातनी की स्थिति में फंसे हैं जो 1962 के बाद से दोनों देशों की सेनाओं के बीच सर्वाधिक लंबा प्रतिरोध है। 1962 में दोनों देशों के बीच जंग हो चुकी है। सिक्किम मई 1976 में भारत का हिस्सा बना। यह एकमात्र प्रदेश है जहां चीन के साथ सीमा सीमांकित है। यहां रेखा चीन के साथ 1898 में हुई संधि पर आधारित है। दोका ला उस क्षेत्र का नाम है जिसकी भूटान दोकलाम के रूप में पहचान करता है जबकि चीन उसे अपना दोंगलांग क्षेत्र होने का दावा करता है।

शुआंग ने कहा, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1959 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई को लिखे पत्र में सिक्किम पर 1890 की चीन-ब्रिटिश संधि का अनुमोदन किया था। परवर्ती भारत सरकारों ने भी इसका अनुमोदन किया है। उन्होंने कहा, सिक्किम में भारत-चीन सीमा सुस्पष्ट रूप से सीमांकित है। भारत ने जो कार्रवाई की वह (पूर्ववर्ती) भारतीय सरकारों के रुख का उल्लंघन है। शुआंग ने कहा, जो कुछ हुआ वह बहुत साफ है, सीमा का सिक्किम का हिस्सा ब्रिटेन और चीन के बीच के 1890 कन्वेंशन से पहले ही परिभाषित है। डोकलाम चीन का है। जब चीनी प्रवक्ता से जर्मनी के हैमबर्ग में होने वाले जी-20 सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिलने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास इसकी कोई सूचना नहीं है कि अन्य देशों के नेताओं के साथ शी की कोई द्विपक्षीय बैठक होनी है या नहीं।
बहरहाल, चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संवाद के लिए रास्ता ‘खुला हुआ और सुगम है।’ दोनों देशों के बीच तनातनी तब उजागर हुई जब चीन ने भारत से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सिक्किम से नाथूला दर्रा होकर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया। पहले उसने कहा कि उसने बारिश और भूस्खलन के चलते तिब्बत में रास्ता खराब होने के कारण यात्रा रोक दी है। बाद में उसने इशारा किया कि मामला सिक्किम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच के गतिरोध से जुड़ा है।

शुक्रवार को जारी भारतीय विदेश मंत्रालय के इस बयान पर कि विवादित डोका ला क्षेत्र में चीनी सेना की ओर से सड़क निर्माण यथास्थिति में उल्लेखनीय बदलाव होता और भारत के लिए इसके ‘गंभीर’ सुरक्षा निहितार्थ होते, चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने भारत के बयान पर गौर किया है। उन्होंने कहा, इसमें सिक्किम और तिब्बत से जुड़े ब्रिटेन और चीन के बीच के 1890 के कन्वेंशन से परहेज किया गया है। लेकिन यह वह करार है जिसने सिक्किम सेक्शन में दोनों पक्षों के बीच के सीमा विन्यास की पुष्टि की है। इस कन्वेंशन को चीन और भारत की उत्तरोत्तर सरकारों ने मान्यता दी है और भारत की सरकारों ने लिखित रूप में इसकी पुष्टि की है। प्रवक्ता ने भारत पर भूटान को आड़ के तौर पर उपयोग करने का आरोप लगाया। शुआंग ने कहा, भारतीय सीमा सैनिकों के अवैध प्रवेश को ढकने के लिए, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने और यहां तक भूटान की स्वतंत्रता और संप्रभुता की कीमत पर वे सही और गलत के बीच घालमेल कर रहे हैं जो गलत है।

 

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