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ट्रकों के पहिए थमे, घर चले गए चालक

देश में करीब 40 लाख से ज्यादा ट्रक हैं। जिनमें से दस लाख से ज्यादा वाहन केवल अनिवार्य सामानों की ढुलाई में लगाए जाते हैं। आल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (एआइटीडब्ल्यूए) के मुताबिक इन दिनों अनिवार्य सामानों की ढुलाई के लिए जरूरी वाहनों में 70 फीसद तक कमी हो गई है। देश के बड़े बंदरगाहों, कार्गों का करीब अस्सी फीसद माल किसी न किसी वजह से अटका पड़ा है। नेशनल लॉजिस्टिक टास्क फोर्स के समक्ष एआइटीडब्ल्यूए ने कई मुद्दे उठाए है। उसने ई-पास जारी करने का अधिकार मांगा है।

Author नई दिल्ली | Published on: April 9, 2020 3:38 AM
माल उठाने के लिए खड़े ट्रक।

पूर्णबंदी की घोषणा के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों ट्रकों के चक्के थम गए हैं। वे आज भी जहां-तहां फंसे हैं। इतना ही नहीं होटल, पेट्रोल पंप, ढाबों की बंदी और पुलिस की घेराबंदी से खौफ खाए चालक अपने घरों को चल दिए। इससे आपूर्ति शृंखला टूटने का अंदेशा पैदा हो गया है। उन्हें काम पर लाने के लिए सरकार ने कुछ यत्न किए हैं।

मसलन काम पर लौटने के लिए ट्रक चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को पूर्णबंदी में छूट देने तथा ई-पास जारी करने आदि। लेकिन जानकारी का अभाव और ई-पास जारी होने की धीमी रफ्तार बड़ी चुनौती है। देश में करीब 40 लाख से ज्यादा ट्रक हैं। जिनमें से दस लाख से ज्यादा वाहन केवल अनिवार्य सामानों की ढुलाई में लगाए जाते हैं। आॅल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (एआइटीडब्ल्यूए) के मुताबिक इन दिनों अनिवार्य सामानों की ढुलाई के लिए जरूरी वाहनों में 70 फीसद तक कमी हो गई है। देश के बड़े बंदरगाहों, कार्गों का करीब अस्सी फीसद माल किसी न किसी वजह से अटका पड़ा है। नेशनल लॉजिस्टिक टास्क फोर्स के समक्ष एआइटीडब्ल्यूए ने कई मुद्दे उठाए है। उसने ई-पास जारी करने का अधिकार मांगा है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप सिघल के मुताबिक देश भर में ट्रक जहां-तहां फंसे हैं। वाहनों को दोबारा काम पर लगाने के लिए सरकार ने ई-पास देने की व्यवस्था की है। लेकिन इसे जारी करने की गति धीमी है। पचास पास की मांग पर महकमा 8-10 ई-पास जारी कर रहा है। अनिवार्य सामानों की ढुलाई के लिए जरूरी वाहनों में 70 फीसद तक कमी हो गई है। ज्यादातर कार्गो, गोदामों और बंदरगाहों से 15-20 फीसद माल ही निकल पा रहा है।

सिंघल ने कहा कि ट्रक चालकों के ड्राइविंग लाइंसेंस को पूर्णबंदी में छूट मिल गई है। उसे दिखा कर कोई भी माल वाहन चालक अपने काम पर लौट सकता है। अपने ट्रक या अपनी कंपनी तक पहुंच सकता है। दरअसल ट्रांसर्पोटरों की मांग पर सरकार ने यह फैसला किया है ताकि पूर्णबंदी के एलान के ठीक बाद जो हजारों चालक ट्रकों को छोड़ अपने-अपने गांव निकल गए थे, उन्हें काम पर लाया जा सके। लेकिन कई जगह नाकों पर पुलिस इसे नहीं मान रही है जिससे स्थिति जस की जस बनी हुई है।

अभी तमाम कर्फ्यू पास की तरह ई-पास भी पुलिस जारी कर रही है। पुलिस पर काम का दबाव है। पास मिलने में तीन-चार दिन लग रहे हैं। कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतिया ने कहा-ई-पास जारी करने के लिए आल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन को अधिकृत करना चाहिए ताकि त्वरित निपटान हो। कैट के महामंत्री व प्रमुख व्यापारी नेता प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कोरोना के डर से श्रमिकों की भी भारी कमी है। खुदरा माल की कमी है।

व्यापारी नेताओं ने कहा कि परिवहन की आवाजाही आदि के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समय समय पर विभिन्न परामर्श जारी किया। लेकिन राज्य स्तर पर स्थानीय प्रशासन सरकार व वहां जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी है। माल की आवाजाही सुचारू बनाने के लिए डीएम और एसपी तक का सामंजस्य जरूरी है।

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