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तेजस्वी संग नीतीश ने की NRC पर चर्चा, पर बीजेपी को रखा दूर, संबोधन में भी लालू यादव, मनमोहन सिंह का लिया नाम; इशारा कुछ और तो नहीं?

दिल्ली और झारखंड में हार के बाद बीजेपी नहीं चाहती कि उसे तीसरे राज्य में भी हार का सामना करना पड़े। इसलिए पार्टी नीतीश के इस फैसले पर कुछ भी कहने से बच रही है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (file)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अचानक बिहार विधानसभा में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करवा कर और 2010 के प्रारूप में एनपीआर लागू करने का फैसला कर सहयोगी बीजेपी को अचरज में डाल दिया है। नीतीश के इस फैसले को चुपचाप स्वाकीर करने के अलावा बीजेपी के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं बचा है क्योंकि राज्य में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी आलाकमान पहले से ही यह ऐलान कर चुका है कि राज्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एनडीए गठबंधन चुनाव लड़ेगा। दरअसल, दिल्ली और झारखंड में हार के बाद बीजेपी नहीं चाहती कि उसे तीसरे राज्य में भी हार का सामना करना पड़े। इसलिए पार्टी नीतीश के इस फैसले पर कुछ भी कहने से बच रही है।

नीतीश के इस फैसले की सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने न तो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को और न ही राज्य नेतृत्व को इस मामले में कोई जानकारी दी थी। नीतीश ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बयान के बाद अचानक विधान सभा में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर दिया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। कुछ दिनों पहले ही बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा बिहार के दौरे पर थे और इस दौरान उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात भी की थी।

हालांकि, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बीजेपी में अकेले ऐसे नेता हैं जिन्होंने नीतीश कुमार का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि यह कहना गलत होगा कि सीएम ने बीजेपी को नजरअंदाज किया है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सुशील मोदी ने कहा, “यह सच है कि हमने सोमवार को एनडीए की बैठक में प्रस्ताव पारित करने पर चर्चा नहीं की। (लेकिन) चूंकि प्रधानमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद नीतीश कुमार ने एनआरसी पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है (देशव्यापी एनआरसी के प्रस्ताव पर अभी तक चर्चा नहीं हुई है), इसलिए यह अब मुद्दा नहीं है। जहां तक एनपीआर की बात है, यह न तो नीतिगत निर्णय है, न ही पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा है… कि प्रश्नों का प्रारूप बदल दिया जाय।”

मंगलवार को नेता विपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा CAA, NPR, NRC पर चर्चा की मांग करने के बाद बिहार विधान सभा में नाटकीय ढंग से एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया। स्पीकर की अनुमति मिलने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने चर्चा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव और राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का भी नाम लिया।

सूत्र बता रहे हैं कि जब सदन में लंच ब्रेक हुआ तो इस दौरान सीएम नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच इस बात पर सहमति बनी कि विधानसभा सर्वसम्मति से एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करेगा। इसके अलावा 2010 के प्रारूप में ही राज्य में एनपीआर होगा। लेकिन इस प्रस्ताव को पेश करने और पारित कराने के दौरान नीतीश की बीजेपी नेताओं से कोई चर्चा नहीं हुई। ऐसे में राज्य के सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि नीतीश कुछ और इशारा तो नहीं कर रहे?
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