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नीतीश कुमार ने फिर संभाली कुर्सी

पद छोड़ने के नौ महीने बाद जनता दल (एकी) के नेता नीतीश कुमार ने रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद की फिर से शपथ ली। उनके साथ तीन महिलाओं समेत 22 मंत्रियों ने भी पद और गोपनियता की शपथ ली। इसके साथ ही बिहार में पिछले कई दिनों से सत्ता संघर्ष को लेकर जारी राजनीतिक […]

Author February 23, 2015 9:18 AM
चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश, ली शपथ (फोटो: भाषा)

पद छोड़ने के नौ महीने बाद जनता दल (एकी) के नेता नीतीश कुमार ने रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद की फिर से शपथ ली। उनके साथ तीन महिलाओं समेत 22 मंत्रियों ने भी पद और गोपनियता की शपथ ली। इसके साथ ही बिहार में पिछले कई दिनों से सत्ता संघर्ष को लेकर जारी राजनीतिक नाटक का अंत हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कोे बधाई दी है।

राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में 63 साल के नीतीश को पद की शपथ दिलाई। समारोह में जीतनराम मांझी भी उपस्थित थे। मांझी ने पार्टी नेतृत्व के आदेशों की अवहेलना करते हुए नीतीश के लिए पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। बिहार पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक ड्रामेबाजी का अखाड़ा बना हुआ था। नीतीश के अलावा तीन महिलाओं सहित 22 मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई।

शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और इनेलो नेता अभय चौटाला मौजूद थे।

मंत्री पद की शपथ लेने वालों में विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव, रमई राम, दामोदर राउत, नरेंद्र नारायण यादव, पीके शाही, श्याम रजक, अवधेश कुशवाहा, लेसी सिंह, दुलाल चंद गोस्वामी, राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह, श्रवण कुमार, रामलषण राम रमन, रामधनी सिंह, जय कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह, जावेद इकबाल अंसारी, बीमा भारती, रंजू गीता, वैद्यनाथ सहनी, विनोद सिंह यादव और नौशाद आलम के नाम शामिल हैं। इन 22 मंत्रियों में से 20 ने मांझी सरकार से इस्तीफा दे दिया था। वहीं पीके शाही और राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने बर्खास्त कर दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मोदी ने ट्वीट किया,‘बिहार का मुख्यमंत्री बनने पर श्री नीतीश कुमार को बधाई और शुभकामनाएं।’

नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में जद (एकी) को मिली करारी हार के बाद 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था। विधायकों के विरोध के बावजूद उन्होंने 20 मई 2014 को मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन निर्णय के आठ महीने के अंदर ही मांझी और जद (एकी) के मंत्रियों और विधायकों के एक धड़े की तरफ से हो रहे विरोध को देखते हुए नीतीश को अपनी योजना में बदलाव लाना पड़ा। भाजपा ने इस मतभेद का फायदा उठाया और मांझी को समर्थन दे दिया। लेकिन मांझी ने विश्वास मत का सामना करने से पहले ही शुक्रवार को राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया।

 

 

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