बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इसके साथ ही संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है, जो संभवतः बीजेपी से होगा। इस फैसले से जनता दल (यूनाइटेड) के कई नेता और कार्यकर्ता हैरान हैं। नीतीश कुमार के साथ अमित शाह भी नामांकन के समय मौजूद थे। इनके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin), उनके सहयोगी शिवेश राम, जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा ने भी नामांकन पत्र दाखिल किए।
नामांकन दाखिल करने से कुछ घंटे पहले नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर बिहार की जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा कि पिछले दो दशकों से उन्हें जनता का भरोसा और समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि राजनीति की शुरुआत से ही उनकी इच्छा थी कि वे संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने इस बार राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बिहार के लोगों से उनका रिश्ता आगे भी बना रहेगा और राज्य के विकास के लिए वे काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। इस फैसले के बाद अमित शाह ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार को “जंगलराज” से निकालकर विकास और सुशासन की राह पर लाया। शाह ने कहा कि नीतीश का अनुभव राज्यसभा की कार्यवाही को और प्रभावी बनाएगा।
कुछ महीने पहले ही नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रिकॉर्ड बनाया था। अगर वे राज्यसभा में जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में समाजवादी दलों के लंबे दौर का अंत माना जाएगा। यह दौर 1990 में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री बनने से शुरू हुआ था और बाद में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जारी रहा।
बीजेपी से अपनी पसंद का सीएम चाहते हैं नीतीश
हालांकि नीतीश कुमार ने अभी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होने हैं और नए सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल से शुरू होगा। इसलिए वे तब तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। लेकिन एनडीए के अंदर सत्ता परिवर्तन की तैयारी शुरू हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार तभी इस्तीफा देंगे जब बीजेपी की तरफ से सत्ता हस्तांतरण का स्पष्ट प्रस्ताव आएगा। बताया जा रहा है कि वे बीजेपी से अपनी पसंद के नेता को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। खबर यह भी है कि जेडीयू की तरफ से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी का नाम चर्चा में है।
मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी के अंदर कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इसके अलावा विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, नेता संजीव चौरसिया, प्रमोद चंद्रवंशी और दलित नेता जनक राम के नाम भी चर्चा में हैं।
नीतीश कुमार के इस फैसले से जेडीयू के कई कार्यकर्ता भावुक और नाराज दिखाई दिए। मुख्यमंत्री आवास 1, अणे मार्ग पर बड़ी संख्या में समर्थक जमा हो गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेताओं को अंदर जाने से रोकने की कोशिश भी की। कई समर्थकों ने कहा कि जब एनडीए ने चुनाव “2025 से 2030 फिर से नीतीश” के नारे पर जीता था, तो अब उन्हें राज्यसभा क्यों भेजा जा रहा है। कुछ लोगों ने पार्टी नेताओं संजय झा और राजीव रंजन सिंह पर भी नाराजगी जताई।
हालांकि राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह फैसला खुद नीतीश कुमार का है। जब नीतीश कुमार नामांकन भरने के लिए घर से निकले तो बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने “नीतीश कुमार जिंदाबाद” के नारे लगाए। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार का यह फैसला जेडीयू के लिए एक नए दौर की शुरुआत है। अब पार्टी के सामने चुनौती है कि वह नए नेतृत्व में खुद को कैसे मजबूत बनाए।
जेडीयू नेतृत्व के कुछ वर्गों में इस फैसले को लेकर अविश्वास का माहौल भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री आवास के करीबी एक सूत्र ने बताया कि उन्हें इस बात का अंदाज़ा तो था कि ऐसा हो सकता है, लेकिन इतनी जल्दी यह फैसला हो जाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। उनके मुताबिक नीतीश कुमार के इस निर्णय ने जनता दल (यूनाइटेड) को एक तरह के चौराहे पर ला खड़ा किया है। साथ ही इससे उनके बेटे निशांत कुमार के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। अब उन्हें तेजी से सीखते हुए खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करना होगा, ताकि पार्टी को संभाला जा सके और आगे की दिशा तय की जा सके।
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बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने की चर्चाओं और उससे पैदा हुई सियासी हलचलों ने जदयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भावनाओं का सैलाब ला दिया है। जैसे ही यह खबर फैली कि उनके नेता राज्यसभा जा सकते हैं, कई कार्यकर्ता बच्चों की तरह रोने-बिलखने लगे। उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था कि वे इस घटनाक्रम से बेहद दुखी और बेचैन हैं। कई समर्थक कह रहे हैं कि उन्होंने अपने नेता को हमेशा बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में ही देखा है और आगे भी उसी रूप में देखना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
