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राज्यपाल की नियुक्ति पर नहीं ली सलाह: नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नेता राम नाथ कोविंद को राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा है कि यह नियुक्ति उनसे सलाह-मशविरा के बगैर की गई है..

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नेता राम नाथ कोविंद को राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर अपनी नाखुशी जाहिर की। (पीटीआई फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नेता राम नाथ कोविंद को राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा है कि यह नियुक्ति उनसे सलाह-मशविरा के बगैर की गई है। नीतीश ने कहा कि उन्हें राज्यपाल की नियुक्ति की सूचना मीडिया के जरिए मिली। वहीं राजधानी में बिहार फाउंडेशन के कार्यक्रम में नीतीश को कुछ लोगों के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।

कोविंद की नियुक्ति के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने पत्रकारों से कहा कि अब तक की परंपरा के मुताबिक, केंद्र सरकार या गृह मंत्री राज्य सरकार, इसके मुख्यमंत्री से राज्यपाल की नियुक्ति के बारे में पूछते हैं। इस बार तो कोई सलाह-मशविरा किया ही नहीं गया। मुझे भी नियुक्ति की सूचना मीडिया के जरिए मिली।

मालूम हो कि साल 1994 से 2006 के बीच दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके 69 साल के कोविंद उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। बिहार विधानसभा चुनावों से महज कुछ महीने पहले उनकी नियुक्ति की गई है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी बिहार का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। पेशे से वकील कोविंद भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष रहे हैं।

नीतीश ने कहा कि उन्हें तो अभी-अभी बिहार के राज्यपाल की नियुक्ति की सूचना मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका अब तक का अनुभव और ज्ञान तो यही कहता है कि ऐसी किसी नियुक्ति से पहले मुख्यमंत्रियों से सलाह-मशविरा किया जाता है।

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को यहां बिहार फाउंडेशन की दिल्ली इकाई का उद्घाटन करते हुए राज्य के लोगों से संपर्क कायम किया। कार्यक्रम में नीतीश संबोधन के लिए उठे तो कुछ युवकों ने उनके खिलाफ नारे लगाए। कुमार ने इस कार्यक्रम के पीछे राजनीतिक इरादे होने से यह कहते हुए इनकार किया कि फाउंडेशन का लक्ष्य देशभर में रह रहे राज्य के प्रवासियों से जुड़ना और उन्हें अपनी जड़ों तक ले जाना है।

करीब आधे दर्जन युवक नारे लगाने लगे और उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर ‘नीतीश वापस जाओ’ के नारे लिखे थे। उनमें से कुछ ने हाल ही में खगड़िया जिले के परबत्ता में महिलाओं के कथित शारीरिक उत्पीड़न व बलात्कार के खिलाफ नारे लगाए।

इस हो-हंगामे के पीछे राजनीतिक मंशा होने का संकेत देते हुए कुमार ने कहा कि प्रदर्शनकारी युवक प्रचार पाने के लिए इस कार्यक्रम में बाधा डालने के वास्ते पूर्वयोजना के साथ आए थे। नीतीश ने कहा, ‘कम से कम अवसर का चुनाव ठीक से सोच-समझकर किया जाना चाहिए। यह कुछ ऐसे ही है जब किसी के घर में कोई कार्यक्रम चल रहा हो तो आप विरोध करने लगें। इसका मतलब यह है कि जो विरोध कर रहे हैं उनका इस कार्यक्रम से कोई लगाव नहीं है और बिहारियों की संवेदना से उन्हें कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘कुछ रोग हैं, जो नहीं जाते। इसे जाने में वक्त लगेगा। क्या यह राजनीति करने का अवसर है? राजनीति का वक्त बिहार में आया है। हम वहां (राजनीतिक) लड़ाई लड़ेंगे। जो भी सरकार में आएगा क्या वह बिहार के प्रवासियों का सम्मान नहीं करेगा जो अच्छा काम कर रहे हैं।

हालांकि कार्यक्रम के आयोजकों ने थोड़ी कहासुनी के बाद उन युवकों को वहां से निकाल दिया। इन युवकों पर प्रहार करते हुए कुमार ने कहा, ‘मीडिया भी यहां मौजूद है। प्रचार पाने का इससे बेहतर मौका क्या हो सकता है। वे चाहे जिस किसी विचारधारा से जुड़े हों लेकिन किसी कार्यक्रम, जिसका लक्ष्य बिहार के लोगों को जोड़ना है, में ऐसा करना, दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं जिनका यहां आने का एकमात्र मकसद हो हंगामा करना था। अन्यथा बिहार फाउंडेशन की खबर इतनी प्रकाशित नहीं होती लेकिन अब उनके हो हंगामे के कारण उसे खूब प्रचार मिलेगा’।

मीडिया से मिली खबर:
मेरा अब तक का अनुभव और ज्ञान तो यही कहता है कि ऐसी किसी नियुक्ति से पहले मुख्यमंत्रियों से सलाह-मशविरा किया जाता है। लेकिन केंद्र सरकार ने इस बार तो कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। मुझे भी नियुक्ति की सूचना मीडिया के जरिए मिली।… नीतीश कुमार, बिहार के मुख्यमंत्री

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