बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर ने जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है। बांकीपुर विधानसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जता था लेकिन यहां प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से जीत दर्ज की। इस सीट पर कुल 25 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई, हालांकि इनमें से सिर्फ तीन ही अपनी जमानत बचा सके।

बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी और राजद प्रत्याशियों के अलावा चुनावी रण में किस्मत आजमाने वाले लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की हार भी सुर्खियों में है। ये दोनों ही निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में थे लेकिन राजद प्रमुख लालू यादव और जदयू चीफ नीतीश कुमार का हमनाम होने की वजह से अब चर्चा बटोर रहे हैं।

लालू प्रसाद और नीतीश कुमार को कितने वोट मिले?

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले जबकि बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा ने 44,827 वोट हासिल किए। इस सीट पर तीसरे नंबर पर राजद की रेखा कुमारी रही, उन्होंने 14,273 वोट हासिल किए। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने वाले लालू प्रसाद यादव को यहां महज 81 वोटों से संतोष करना पड़ा जबकि नीतीश कुमार को 149 वोट मिले।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव परिणाम 2026

क्रम संख्याप्रत्याशीपार्टी वोट
1प्रशांत किशोरजन सुराज641,151
2नीरज कुमारबीजेपी44,827
3रेखा कुमारीराजद14,273
4नीतीश कुमारनिर्दलीय141
5लालू प्रसाद यादवनिर्दलीय81

बांकीपुर हार बीजेपी के लिए चिंताजनक क्यों?

बांकीपुर विधानसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर लंबे समय से बीजेपी का कब्जा था। नितिन नबीन इस सीट से कई बार विधायक रहे हैं, उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए बांकीपुर की हार को बीजेपी के लिए चिंता का बड़ा विषय माना जा रहा है।

बांकीपुर शहरी सीट है, इस सीट पर सवर्ण मतदाताओं की अच्छी संख्या है। आमतौर पर माना जाता है कि सवर्ण मतदाता बीजेपी को वोट करता है लेकिन इस उपचुनाव में बीजेपी समर्थकों में सेंध लगाने में सफल रहे। पीके को बांकीपुर उपचुनाव में करीब 50% वोट मिला। इतना ही नहीं, उन्होंने बांकीपुर विधानसभा के हर क्षेत्र में बीजेपी प्रत्याशी से ज्यादा वोट हासिल किए।

यह भी पढ़ें: प्रशांत किशोर से लेकर चंद्रशेखर आजाद और ओवैसी से जयराम महतो तक… दम दिखा रहे अकेले विधायक और सांसद

बिहार की विधानसभा में प्रशांत किशोर जन सुराज पार्टी के अकेले विधायक होंगे। पढ़िए, किस तरह चंद्रशेखर आजाद, जयराम महतो और असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।