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बिहार: भाजपा को लगा झटका जब नीतीश कुमार ने छिना विपक्षी दल का दर्जा

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के सदन में विश्वासमत प्रस्ताव पेश करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने आज भाजपा के स्थान पर जदयू को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा दे दिया। भाजपा ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘‘मनमाना’’ करार दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा नेता नंद किशोर यादव […]

Author February 19, 2015 3:36 PM

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के सदन में विश्वासमत प्रस्ताव पेश करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने आज भाजपा के स्थान पर जदयू को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा दे दिया। भाजपा ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘‘मनमाना’’ करार दिया।

विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा नेता नंद किशोर यादव के स्थान पर जदयू के नेता विजय चौधरी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया।

विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘विधानसभा सचिवालय को संख्या बल के मुताबिक काम करना होगा और चूंकि जदयू ने मुख्य विपक्षी के दर्जे की मांग की थी इसलिए उसकी संख्या बल पर विचार करते हुए उसे यह दर्जा देने से इंकार नहीं किया जा सकता।’’

पार्टी अध्यक्ष शरद यादव द्वारा मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्हें असंबद्ध सदस्य घोषित किया गया है। उन्हें कल सदन में बहुमत सिद्ध करना होगा।

जदयू को विधानपरिषद में भी मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिला है।

विधानपरिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘संख्या बल के आधार पर जदयू को विधानपरिषद में मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर घोषित करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचता।’’

इस बीच, विधानसभा अध्यक्ष के ‘‘मनमाने’’ फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नाराज भाजपा सदस्य विधानसभा के प्रवेश द्वार के समक्ष धरने पर बैठ गए।

नंद किशोर यादव ने कहा, ‘‘देश में यह पहली बार है जब एक पार्टी – जदयू सत्ता और विपक्ष दोनों खेमे में बैठेगी।’’

उन्होंने दावे के साथ कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर मांझी को समर्थन देने से इंकार कर चुकी थी लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह मांझी सरकार में शामिल होने वाली थी।
यादव ने तर्क दिया, ‘‘यहां तक कि राजग में रहते हुए नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था जबकि अन्य सहयोगियों ने पी. ए. संगमा के पक्ष में मतदान किया था। इसलिए मुद्दा आधारित समर्थन का अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि कोई पार्टी सरकार में शामिल हो रही है।’’

जदयू विधायक दल के नेता विजय चौधरी ने कल सर्वदलीय बैठक में विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था कि वह उन्हें विपक्षी सीटों पर बैठने की अनुमति दें क्योंकि उसने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के कल के विश्वास मत प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला किया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘सदन का कामकाज नियम और कानून के मुताबिक चलता है न कि किसी के मर्जी पर… ‘संख्या बल’ के आधार पर जदयू को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा नहीं देने का कोई कारण नहीं बनता।’’

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नियम के मुताबिक, जदयू को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा दिया जाता है और उसके नेता विजय चौधरी को सदन में विपक्ष का नेता स्वीकार किया जाता है।

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा की मौजूदा क्षमता 233 है। इसमें फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष सहित जदयू के पास 110 विधायक, मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के रूप में एक असंबद्ध सदस्य, भाजपा के 87 सदस्य, राजद के 24, कांग्रेस के पांच, भाकपा के एक, निर्दलीय पांच जबकि 10 सीट खाली हैं।

 

 

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