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नीतीश कटारा हत्याकांड: विकास व विशाल की सजा 30 साल बढ़ी

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नीतीश कटारा हत्याकांड में मौत की सजा देने की याचिका को ठुकराते हुए उत्तर प्रदेश के राजनीतिज्ञ डीपी यादव के पुत्र विकास यादव और उसके चचेरे भाई विशाल की आजीवन कारावास की सजा बिना किसी छूट के बढ़ाकर 25 साल तक कर दी। इसके अलावा अदालत ने इन दोनों […]
Author February 7, 2015 08:02 am
नीतीश कटारा हत्याकांड में सजा का ऐलान, विकास व विशाल को 25-25 साल की कैद

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नीतीश कटारा हत्याकांड में मौत की सजा देने की याचिका को ठुकराते हुए उत्तर प्रदेश के राजनीतिज्ञ डीपी यादव के पुत्र विकास यादव और उसके चचेरे भाई विशाल की आजीवन कारावास की सजा बिना किसी छूट के बढ़ाकर 25 साल तक कर दी। इसके अलावा अदालत ने इन दोनों को मामले से जुड़े सबूत नष्ट करने के मामले में पांच साल की अतिरिक्त सजा सुनाई। इसे मिलाकर इन दोनों को 30 साल जेल में काटने होंगे। अदालत ने कहा कि विकास की बहन से प्यार करने वाले नीतीश की हत्या ‘झूठी शान के नाम पर की गई हत्या’ थी जिसे अत्यंत प्रतिशोधपूर्ण रवैये के साथ सोच-समझ कर साजिश रचकर अंजाम दिया गया था।

अदालत ने एक अन्य दोषी सुखदेव यादव उर्फ पहलवान को भी बिना किसी छूट के 20 साल की बढ़ी हुई उम्रकैद सुनाई गई। उसने कहा कि यह अपराध ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ की श्रेणी में आता है। लेकिन अदालत ने उसे फांसी से राहत देते हुए कहा कि उसके सुधार और पुनर्वास की संभावना खारिज नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति जेआर मिधा के विशेष पीठ ने अभियोजन पक्ष, नीतीश की मां और दोषियों की अपीलों को निपटाते हुए तीनों को निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा को बढ़ाने का फैसला किया और कहा कि अपराध की गंभीरता उन्हें पर्याप्त रूप से दंडित करने की जरूरत बताती है।

अदालत ने विकास और विशाल पर लगाए गए जुर्माने की रकम भी बढ़ाते हुए उन पर 54-54 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जिसे छह हफ्ते के अंदर निचली अदालत में जमा करना होगा। इस राशि में से 50 लाख रुपए दिल्ली सरकार को और दस लाख रुपए उत्तर प्रदेश सरकार को दिए जाएंगे जबकि 40 लाख रुपए नीतीश की मां नीलम कटारा को दिए जाएंगे। हालांकि नीलम कटारा ने कहा कि उनके बेटे की मौत के लिए कोई आंकड़ा नहीं तय किया जा सकता और वे पैसा नहीं लेंगी।
विकास और विशाल को क्रम से 19 और 18 साल और जेल में बिताने होंगे। सुखदेव को करीब 16 साल तक जेल में रहना होगा जो घटना के बाद से फरार हो गया था और जिसे 2005 में गिरफ्तार किया गया था। पीठ ने राय जताई कि जेल की सजा बिना छूट के चलनी चाहिए।

अदालत ने 700 से ज्यादा पन्ने के अपने फैसले में कहा कि विकास ने अस्पताल में जो वक्त (10 अक्तूबर 2011 से चार नवंबर 2011) गुजारा है, उसे उसकी जेल में अब तक गुजारी अवधि में नहीं गिना जाएगा। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से इस बात की भी जांच करने को कहा कि दोषी सजा काटने के दौरान कितनी बार अस्पताल में रहे।

विकास, उसके चचेरे भाई विशाल और सुखदेव पहलवान को 16-17 फरवरी 2002 की दरम्यानी रात को एक रेलवे अधिकारी के पुत्र नीतीश कटारा की अपहरण के बाद हत्या का दोषी ठहराया गया है। ये लोग नीतीश के डीपी यादव की पुत्री भारती से प्रेम संबंधों के खिलाफ थे। अदालत अप्रैल 2014 से तीनों दोषियों को दी जाने वाली सजा पर बहस सुन रही थी। पीड़ित की मां नीलम कटारा और दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए तीनों के लिए मौत की सजा मांगी थी कि उनका अपराध दुर्लभतम की श्रेणी में आता है। हालांकि अदालत ने उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया।

हाई कोर्ट ने दो अप्रैल 2014 को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे ‘आॅनर किलिंग’ बताया था जो जाति व्यवस्था में गहराई तक पैठ बना चुके विचारों का नतीजा थी।

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