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नितिन गडकरी ने दिखाई दरियादिली, सेक्रेटरी के लिए तोड़ दिया प्रोटोकॉल

गडकरी ने प्रोटोकॉल की परवाह ना करते हुए पहले वाईएस मलिक को समिट को संबोधित करने को कहा। इसके बाद मंच पर पहुंचे वाईएस मलिक ने इस बात का खुलासा किया कि नितिन गडकरी ने पहले उन्हें संबोधित करने के लिए क्यों कहा है।

नितिन गडकरी ने मंत्रालय सचिव के लिए प्रोटोकॉल तोड़ा।

केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को दरियादिली दिखाते हुए परिवहन मंत्रालय के सचिव के लिए प्रोटोकॉल तोड़ दिया। दरअसल नितिन गडकरी ग्लोबल मॉबिलिटी समिट के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेशन में शिरकत करने पहुंचे थे। जब गडकरी से समिट को संबोधित करने के लिए कहा गया तो उन्होंने इससे इंकार करते हुए कहा कि वह परिवहन मंत्रालय के सचिव वाईएस मलिक के बाद बोलेंगे। हालांकि प्रोटोकॉल के तहत सचिव मंत्रियों के बाद ही लोगों को संबोधित करते हैं। लेकिन इसके बावजूद गडकरी ने प्रोटोकॉल की परवाह ना करते हुए पहले वाईएस मलिक को समिट को संबोधित करने को कहा। इसके बाद मंच पर पहुंचे वाईएस मलिक ने इस बात का खुलासा किया कि नितिन गडकरी ने पहले उन्हें संबोधित करने के लिए क्यों कहा है। वाईएस मलिक ने बताया कि कुछ देर पहले ही वह नितिन गडकरी के साथ मजाक में कह रहे थे कि मंत्रियों के भाषण देने के बाद अधिकारियों के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचता। इसलिए गडकरी ने आज उन्हें पहले बोलने को कहा है। वाईएस मलिक के इतना कहते ही लोग हंस पड़े।

शरद यादव का तीखा जवाबः कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की किताब लॉन्चिंग के मौके पर कई बड़े-बड़े नेता पहुंचे। इस दौरान कपिल सिब्बल और पी. चिदंबरम ने साल 2014 में हुई कांग्रेस की हार पर अपने-अपने तर्क दिए। तभी शरद यादव ने इस मुद्दे पर ऐसा तीखी बात कही कि कांग्रेस नेताओं के चेहरे देखने लायक थे। दरअसल शरद यादव ने 2014 में कांग्रेस की हार पर सीधे शब्दों में कहा कि “हारना तो जरुरी था, लेकिन इतनी बुरी तरह हारना….!” इसी दौरान भाजपा से टीएमसी में गए चंदन मित्रा ने आगामी लोकसभा चुनावों में पीएम पद के उम्मीदवार पर कहा कि यदि 2019 में विपक्षी गठबंधन जीतता है तो पीएम किसी क्षेत्रीय पार्टी के नेता को बनाना चाहिए। चंदन मित्रा के इस बयान से अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि उनका इशारा किसकी तरफ है।

सरकार पड़ी नरमः केन्द्र की भाजपा सरकार अपने अब तक के कार्यकाल में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर्स के साथ थोड़ी सख्त रही है। लेकिन अब अपने शासन के पांचवे साल में केन्द्र सरकार के सख्त रुख में कुछ नरमी आयी है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय त्रिपुरा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के खिलाफ मिली शिकायत को ड्रॉप कर सकता है। दरअसल यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर अनियमितता बरतने के आरोप में एचआरडी मिनिस्टरी ने वाइस चांसलर को कारण बताओं नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। लेकिन अब मंत्रालय ने राष्ट्रपति को सूचित कर कहा है कि मंत्रालय अब इस शिकायत को आगे जारी नहीं रखना चाहता।

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