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NITI आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष बोले- तेल से कमाए 50 अरब डॉलर कोरोना-पीड़ितों को दे सकती है सरकार

भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब रूस-सऊदी के बीच तेल के दाम कम करने को लेकर मुकाबला चल रहा है और दुनिया कोरोनावायरस की वजह से बुरे दौर से गुजर रही है।

NITI आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष बोले- तेल से कमाए 50 अरब डॉलर कोरोना-पीड़ितों को दे सकती है सरकार
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (बाएं) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ। (फाइल)

दुनिया के जाने-माने अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कोरोनावायरस से जंग के लिए भारत को अहम सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि भारत को दुनियाभर में कच्चे तेल की कम हुई कीमतों का फायदा उठाना चाहिए और इससे जुटाए गए फंड को कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल करना चाहिए। पनगढ़िया के मुताबिक, इस फायदे को आम लोगों तक सीधा कैश ट्रांसफर के जरिए पहुंचाना चाहिए।

पनगढ़िया के मुताबिक, कोरोनावायरस संकट आकस्मिक रूप से ऐसे समय आया है, जब दुनियाभर में तेल के दाम लगातार गिर रहे हैं। 1 मार्च से अब तक तेल के दामों में करीब 30% की कमी आई है। जिस तरह भारत बड़े स्तर पर कच्चे तेल का आयात करता है, उस लिहाज से जब-जब तेल के दाम 10 डॉलर प्रति बैरल नीचे गिरे, तब भारत ने 15 अरब डॉलर (करीब 1.13 लाख करोड़ रुपए) बचाए। जब तेल के दाम 65 डॉलर प्रति बैरल से गिर कर 30 डॉलर प्रति बैरल पहुंचे, तो भारत को करीब 50 अरब डॉलर (3.80 लाख करोड़ रुपए) का फायदा हुआ।

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और मौजूदा समय में अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पनगढ़िया ने कहा कि अगर इसके आधे को भी ज्यादा एक्साइज टैक्स के साथ राजस्व में बदल दें तो सरकार के पास अतिरिक्त खर्च के लिए भी राजस्व निकल आएगा। ऐसे में भारत को वित्तीय घाटा लक्ष्य 3.5% के आसपास बना रहेगा।

कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आर्थिक घाटा निर्धारित किए गए लक्ष्य से ज्यादा रहेगा। इसीलिए कच्चे तेल के दामों में कमी से भारत को जो फायदा मिलता है उसका फायदा अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में किया जा सकता है। कोरोनावायरस महामारी भी ऐसे समय में आई है, जब अर्थव्यवस्था पहले ही स्लोडाउन के शिकंजे में है। स्लोडाउन की वजह से जो भी सुस्त राजस्व जुटेगा वह अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने में नाकाफी ही होगा।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री को आर्थिक मामलों पर सलाह देने वाली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सी रंगराजन के मुताबिक, कोरोनावायरस के प्रभाव के बगैर भी इस वित्तीय वर्ष का घाटा बढ़ने के आसार थे। अब वायरस के असर के बाद इससे बचाव, टेस्टिंग और हेल्थकेयर के लिए सरकार को खर्च बढ़ाना पड़ेगा, जिससे वित्तीय घाटा बढ़ेगा। इसलिए अर्थव्यवस्था के उभरने की संभावनाएं सीमित हैं। अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए सरकार ज्यादा से ज्यादा पेट्रोल उत्पादों पर लगी एक्साइज ड्यूटी से जुटाई गई राशि के बारे में सोचा जा सकता है। कुछ राज्य कोरोनावायरस से लोगों को बचाने के लिए कड़े प्रतिबंध भी लगा रहे हैं।

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First published on: 23-03-2020 at 09:24:32 am