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NITI आयोग के सीईओ ने माना, विदेश से मिलने वाली मदद सीमित, सभी राज्यों में नहीं हो सकता बराबर बंटवारा

NITI आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बताया- हमें विदेशों से मिले सभी कंसाइनमेंट अगले ही दिन राज्यों को डिलीवर, कस्टम्स पर कुछ नहीं रोका गया।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: May 13, 2021 8:48 AM
कोरोनाकाल में भारत को अब तक सबसे ज्यादा मदद अमेरिका की ओर से भेजी गई है। (फोटो- AP)

भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर अनियंत्रित होने के बाद दुनियाभर के कई देश मदद के लिए हाथ बढ़ा चुके हैं। इस संकट के समय में ऑक्सीजन से लेकर जीवनरक्षक दवाओं तक की आपूर्ति में भारत के मित्र देशों ने हाथ बढ़ाया है। हालांकि, हाल ही में यह सवाल उठे थे कि केंद्र सरकार विदेश से मिली सहायता का अपने राज्यों के बीच ही ठीक से बंटवारा नहीं कर पा रही। एक स्तर से दूसरे में मदद पहुंचने के बीच लाल फीताशाही को भी बड़ी वजह माना जा रहा था। अब NITI आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने इन सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने बताया है कि क्यों विदेश से मिलने वाली मदद सीमित रही है और क्यों इनका सभी राज्यों में जरूरत के हिसाब से बराबर बंटवारा नहीं हो सकता।

द इंडियन एक्सप्रेस से की गई बातचीत में कांत से जब विदेशी सप्लाई के प्रबंधन पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया- “हमारे पास तीन चैनल हैं। सरकार से सरकार, प्राइवेट से सरकार और राज्य/एनजीओ और सिविल सोसाइटी संगठनों को मिलने वाले डोनेशन। सरकार से सरकार के लेन-देन में माल पाने वाली इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी है और इस मदद को भारतीय विदेश मंत्रालय से स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ भेजा जाता है, ताकि राज्यों को हिस्सा भेजा जा सके। किसी राज्य के आवंटन के लिए यही एसओपी है, इसमें कुछ और मानकों पर भी विचार किया जाता है, जैसे वहां केस लोड कितना है और कौन सा क्षेत्र मेडिकल हब है। किसमें संसाधनों की कमी है और कौन भौगोलिक तौर पर कटा हुआ है।”

उन्होंने बताया कि प्राइवेट से सरकार का लेन-देन COVAID पोर्टल (Covaid.niti.gov.in) के जरिए हो रहा है, जिसे NITI आयोग ही मैनेज करता है। इस तरह की मदद को कस्टम और IGST से छूट मिली है और दानकर्ता दान की वजह, कुछ अन्य जानकारियां और कंसाइनमेंट नंबर डालकर मदद भेज सकते हैं। यह मदद इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी तक पहुंचती है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ही इसका आवंटन किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और दानकर्ता अपने शिपमेंट की स्थिति भी जान सकते हैं।

इसके अलावा तीसरा तरीका राज्यों, एनजीओ या सिविल सोसाइटी को सीधी मदद मिलने का है। इसके लिए हर राज्य-केंद्र शासित प्रदेश में एक नोडल अफसर तैनात किया गया है और कस्टम क्लियरेंस के लिए जानकारी से जुड़ा एक फॉर्म भरा जा सकता है। कांत ने बताया कि अब तक जितनी सप्लाई मिली है, उसमें 95 फीसदी डिलीवर की जा चुकी है और बाकी मार्ग पर हैं। किसी भी आइटम को रोका नहीं गया, न ही देर लगाई जा रही है।

किस देश से किए गए कितने ऑर्डर?: अलग-अलग देशों को दिए गए ऑर्डर के सवाल पर अमिताभ कांत ने बताया- “हमें अब तक 87 कंसाइनमेंट मिले हैं। इनमें से 64 सरकार से सरकार के चैनल और 23 प्राइवेट संस्थान से सरकार को मिले हैं। लिक्विड ऑक्सीजन शिप्स के जरिए बहरीन, यूएई और फ्रांस से लाई जा रही है। जिन अहम जरूरत के सामान को लाया गया है, उनमें ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन प्लांट्स, रैपिड डिटेक्शन किट्स और रेमडेसिविर जैसी दवाएं शामिल हैं।”

इसके अलावा भारत को कई अन्य दवाएं, लिक्विड ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क, पीपीई किट्स, सैनिटाइजर और पल्स ऑक्सीमीटर जैसी चीजें मिली हैं। सबसे ज्यादा मदद अमेरिका से मिली है, जबकि ब्रिटेन, इजराइल, जर्मनी, इटली, फ्रांस, कनाडा और यूएई ने भी अच्छी मदद भेजी है।

राज्यों तक मदद पहुंचने में कितनी देरी?: विदेश से मिल रही मदद कस्टम्स के पास रोके जाने और इन्हें राज्यों को पहुंचाए जाने में देरी के सवाल पर नीति आयोग के सीईओ ने बताया- “9 मई तक मिले सारे आइटम अगले दिन ही डिलीवर कर दिए गए। 9 मई से 11 मई तक हमें दक्षिण कोरिया, यूएई, मिस्र, यूके, कुवैत, इजराइल, अमेरिका और नीदरलैंड्स से और मदद मिली है। इन सबको भी तुरंत डिस्पैच कर दिया गया और यह या तो रास्ते में हैं या डिलीवर किए जा चुके हैं। ऐसा कोई भी कंसाइनमेंट नहीं है, जिसे कस्टम्स के पास रोका गया हो।”

राज्यों को कैसे किया जा रहा आवंटन?: अमिताभ कांत ने बताया कि राज्यों को आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी है। चूंकि मिलने वाली मदद सीमित है, इसलिए सभी संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। इसलिए पहले कोरोना के ज्यादा मामले वाले राज्यों के प्राथमिकता दी जा रही है। हम उन राज्यों/शहरों पर भी ध्यान दे रहे हैं, जो मेडिकल हब हैं या जहां पड़ोसी राज्यों और शहरों से मरीजों का आना ज्यादा है।

अगर हम उत्तर प्रदेश को देखें, तो यह भारत का सबसे बड़ा राज्य है। इसे अब तक 400 वेंटिलेटर्स, 26 हजार रेमडेसिविर की शीशियां और अन्य सप्लाई के साथ 10 हजार रैपिड टेस्ट किट्स भी दी गई हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र को 300 वेंटिलेटर्स, 55 हजार रेमडेसिविर दी गई हैं। बिहार को 10 हजार रैपिड टेस्ट किट्स और 300 वेंटिलेटर्स दिए गए। छत्तीसगढ़ को जरूरी उपकरणों के साथ 300 कंसंट्रेटर्स और 40 हजार रैपिड टेस्ट किट्स दी गईं।

नीति आयोग सीईओ ने बताया कि यह सारे आवंटन काफी विचार करने के बाद किए गए हैं। हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे राज्य जो बाकियों से कटे हैं और जहां संसाधनों की कमी है वहां कोई समस्या न आए। अगर हम नॉर्थईस्ट को देखें, तो वहां टैंकर आसानी से और जल्द नहीं पहुंच सकते। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी ऐसे ही हालात हैं। इन दोनों के बीच 1200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बांटे जा चुके हैं। यह सब सिर्फ तैयारी के उच्च स्तर को बनाए रखने के लिए हुआ है, जबकि वहां आबादी का घनत्व और केसलोड दोनों ही काफी कम हैं।

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